सुप्रीम कोर्ट ने रफाल सौदे की जांच करने की मांग करने वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं. इन याचिकाओं में मांग की गई थी कि यह जांच अदालती निगरानी में हो. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने एकमत से यह फैसला सुनाया. अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता इसका कोई सबूत पेश करने में नाकाम रहे कि इस सौदे में किसी तरह का पक्षपात हुआ है. उसका यह भी कहना था कि वह सरकार की बुद्धिमत्ता पर फैसला नहीं दे सकती. शीर्ष अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर न्यायिक समीक्षा करते हुए अदालतों को सावधान रहना चाहिए और सुरक्षा के मोर्चे पर देश की तैयारी में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए.

फ्रांस के साथ 36 रफाल विमानों के इस सौदे को लेकर पिछली सुनवाई 14 नवंबर को हुई थी. तब शीर्ष अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. विपक्षी कांग्रेस इस सौदे को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधती रही है. पार्टी प्रमुख राहुल गांधी इसे लेकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा चुके हैं. उनका कहना है कि प्रधानमंत्री ने ये सौदा कर्ज में डूबे अपने मित्र अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए किया. हालिया चुनावों में भी वे प्रमुखता से यह मुद्दा उठाते रहे. यही वजह है कि इस फैसले को कांग्रेस के लिए झटका जबकि मोदी सरकार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.