श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनाए एक फैसले में राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना द्वारा वहां की संसद को भंग करने के कदम को असंवैधानिक करार दिया. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सिरीसेना के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

श्रीलंका में इस विवाद की शुरूआत तब हुई जब मैत्रीपाला सिरीसेना ने 26 अक्टूबर को एक विवादित कदम उठाते हुये प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर उनकी जगह पर पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को नियुक्त कर दिया. इतना ही नहीं विवाद बढ़ने पर उन्होंने नौ नवंबर को संसद को भंग करते पांच जनवरी को अगला आम चुनाव करवाने का ऐलान भी कर दिया था.

इसके बाद रानिल विक्रमसिंघे और उनकी पार्टी ने इस कदम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए कहा, ‘राष्ट्रपति संसद को तब तक भंग नहीं कर सकते जब तक संसद का साढ़े चार साल का कार्यकाल पूरा नहीं हो जाता.’

अदालत के फैसले से साफ है कि श्रीलंका में आम चुनाव फरवरी 2020 के बाद होंगे और रानिल विक्रमसिंघे के प्रधानमंत्री के रूप में बहाली की संभावना बढ़ जाएगी क्योंकि संसद में उनकी पार्टी गठबंधन के साथ बहुमत में है. बीते बुधवार को संसद ने रानिल विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री मानते हुए उनके समर्थन में एक विश्वास मत भी पारित किया था.