इस साल देश का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ‘ज्ञानपीठ’ अंग्रेजी उपन्यासकार अमिताव घोष को दिया जाएगा. महाराष्ट्र टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को नई दिल्ली में हुई ज्ञानपीठ पुरस्कार चयन समिति की बैठक में सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया. ज्ञानपीठ पुरस्कार के लिए उन्हें चुने जाने की जानकारी देते हुए अमिताव घोष ने ट्विटर पर लिखा है, ‘यह मेरे लिए अद्भुत दिन है. मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन खुद को उस सूची में पाऊंगा, जिसमें वे लेखक भी हैं, जिन्हें मैं सबसे ज्यादा पसंद करता हूं.’ अमिताव घोष अंग्रेजी के पहले लेखक हैं जिन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है.

अंग्रेजी उपन्यासकार अमिताव घोष का जन्म साल 1956 में कोलकाता हुआ था. उन्हें साल 2007 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है. उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘द सर्किल ऑफ रीजन’(1986), ‘ शेडो लाइन’(1988), ‘द कलकत्ता क्रोमोसोम’(1995), और ‘सी ऑफ पॉपीज’ (2008) शामिल हैं.

दिल्ली स्थित साहित्यक संस्था भारतीय ज्ञानपीठ साल 1961 से हर साल ज्ञानपीठ पुरस्कार से लेखकों को सम्मानित करती आ रही है. यह पुरस्कार भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी के लेखकों को दिया जाता है. इस पुरस्कार के लिए अंग्रेजी भाषा को तीन साल पहले ही शामिल किया गया था.