अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाने के मुद्दे पर अब एनडीए की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. पार्टी का कहना है कि अगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुवाई वाली एनडीए सरकार अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लेकर आती है तो उसे जदयू का सहयोग नहीं मिलेगा. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक जदयू के राष्ट्रीय महासचिव रामचंद्र प्रसाद सिंह ने शुक्रवार को यह बात कही है. उन्होंने कहा है, ‘समता पार्टी के दिनों से ही इस विवाद पर हमारा रुख साफ है. इसका फैसला आम सहमति से या फिर कोर्ट के निर्णय से होना चाहिए. इसका कोई तीसरा रास्ता नहीं हो सकता.’

इससे पहले जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने द इंडियन एक्सप्रेस के साथ एक खास बातचीत में कहा था, ‘निश्चित तौर पर भगवा पार्टी की लोकप्रियता 2014 के बाद से गिरी है, लेकिन भाजपा बिना राम मंदिर का मुद्दा उठाए भी चुनाव जीत सकती है.’ उन्होंने यह भी कहा था कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे भाजपा के लिए खतरे की घंटी नहीं हैं और पार्टी को आम चुनावों में जीत के लिए विकास के एजेंडे पर बने रहना चाहिए.

वहीं एनडीए के एक और सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान पहले ही भाजपा के हिंदुत्व के एजेंडे पर असहमति जता चुके हैं. गौरतलब है कि पिछले कई दिनों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राम मंदिर को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाए हुए हैं. संघ का मानना है कि सरकार को लोगों की आस्था का ध्यान रखते हुए अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लेकर आना चाहिए.