भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) बुधवार शाम श्रीहरिकोटा से संचार उपग्रह ‘जीसैट-7ए’ को अंतरिक्ष में भेजेगा. जीसैट-7, जीसैट-6 और इस नए जीसैट-7ए को मिलाकर ‘इंडियन एंग्री बर्ड’ कहा जा रहा है, जो भारतीय सेनाओं के लिए मददगार होंगे. जीसैट-7ए ख़ास तौर पर भारतीय वायु सेना के लिए अहम होगा.

ख़बरों के मुताबिक जीसैट-7ए के प्रक्षेपण की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. यह इसरो का इस साल का 17वां और अंतिम मिशन होगा. यह वायुसेना की सभी परिसंपत्तियों को आपस में जोड़ने में सहयोग करेगा. इसके जरिए वायुसेना के विमान, हवा में मौजूद वार्निंग कंट्रोल प्लेटफॉर्म, ड्रोन और ग्राउंड स्टेशन आपस में एक केंद्रीय नेटवर्क से जुड़ जाएंगे.

एनडीटीवी के मुताबिक ‘जीसैट-7ए’ का वजन करीब 2,250 किलोग्राम है. इसे जीएसएलवी एमके-III (भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान मार्क-III) से प्रक्षेपित किया जाएगा. नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर एयर पॉवर स्टडीज के अतिरिक्त महानिदेशक एयर वाइस मार्शल (सेवानिवृत्त) एम बहादुर का कहना है, ‘इससे भारतीय वायुसेना को वो ताकत मिलेगी, जिसकी उसे बहुत जरूरत है..’

इसरो ने इस साल मार्च में भारतीय सेना के लिए ‘जीसैट-6’ को प्रक्षेपित किया था. जबकि 2013 में ‘जीसैट-7’ लॉन्च किया था जो भारतीय नौसेना के काम आ रहा है. ये तीनों उपग्रह (जीसैट-6, जीसैट-7 और जीसैट-7ए) मिलकर कम्युनिकेशन बैंड तैयार करेंगे जो सेनाओं के बीच संपर्क और संवाद बढ़ाने में मददगार होगा.