पांच राज्यों के हालिया विधानसभा चुनावों में मनमाफिक नतीजे नहीं आने के बाद भारतीय जनता पार्टी में विचारमंथन का दौर जारी है. सूत्रों के मुताबिक 2019 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री बदलने पर भी विचार कर रही है. उसको लगता है कि ऐसा करने से राज्य और केंद्र की भाजपा सरकार के प्रति आम लोगों का गुस्सा कम होगा और आम चुनाव में पार्टी को इसका फायदा मिल सकता है.
भाजपा नेताओं से बातचीत में पता चलता है कि जिन दो राज्यों के मुख्यमंत्री बदले जाने की सबसे अधिक चर्चा है, वे हैं झारखंड और हरियाणा. इन दोनों राज्यों में अगले साल अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं. पार्टी में इस बात पर भी विचार चल रहा है कि इन दोनों राज्यों की विधानसभाओं को भंग कराके विधानसभा चुनाव भी लोकसभा चुनाव के साथ ही करा लिए जाएं. पार्टी को लगता है कि इससे इन दोनों राज्यों में उसे नरेंद्र मोदी की छवि और उनकी अगुवाई वाली केंद्र सरकार के कामकाज के आधार पर खड़ा किए जाने वाले चुनाव अभियान का फायदा मिल सकता है.
झारखंड और हरियाणा में भाजपा का काम देखने वाले नेताओं को यह भी लगता है कि अगर इन राज्यों में विधानसभा चुनाव अलग से होते हैं तो भाजपा के लिए सत्ता में वापसी मुश्किल होगी. हालांकि, इन दोनों राज्यों में समय से पहले चुनाव कराने को लेकर अब तक पार्टी में अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है.
पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं को स्थानीय नेताओं से हरियाणा और झारखंड की सरकारों के कामकाज की शिकायत लंबे समय से से मिलती रही है. कुछ समय पहले हरियाणा भाजपा के कुछ प्रमुख नेताओं को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बुलाया था और सरकार के कामकाज पर उनके साथ उन्होंने खुलकर चर्चा की थी. ऐसे ही कुछ महीने पहले झारखंड भाजपा के कुछ प्रमुख नेताओं की मुलाकात पहले अमित शाह और बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी हुई थी. पार्टी के शीर्ष दो नेताओं से मिलने वालों में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और रघुबर दास सरकार के वरिष्ठ मंत्री सरयू राय भी शामिल थे.
झारखंड में नेतृत्व परिवर्तन की एक वजह के तौर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के नतीजों को भी बताया जा रहा है. छत्तीसगढ़ में पार्टी की करारी हार के बाद झारखंड भाजपा के कई बड़े नेता पार्टी आलाकमान से यह कह रहे हैं कि अगर भाजपा को अगले लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करना है तो किसी आदिवासी नेता को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए. पार्टी के आला नेताओं को यह भी बताया जा रहा है कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो सूबे के आदिवासी भाजपा के खिलाफ वोट दे सकते हैं. ऐसे में पार्टी के अंदर मौजूदा मुख्यमंत्री रघुबर दास को हटाने की चर्चा जोर पकड़ रही है.
इस पृष्ठभूमि में झारखंड के नए मुख्यमंत्री के तौर पर भाजपा में सबसे अधिक चर्चा पहले भी मुख्यमंत्री रहे अर्जुन मुंडा की हो रही है. अर्जुन मुंडा का पहले भी मुख्यमंत्री पद पर रहना और उनकी वजह से आदिवासी वोट बैंक को पार्टी के साथ बने रहने की संभावना उन्हें मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में सबसे आगे कर रही है. हालांकि, जो लोग अर्जुन मुंडा के विरोधी हैं, वे यह कह रहे हैं कि अर्जुन मुंडा विधायक नहीं हैं, इसलिए उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाना चाहिए. लेकिन इसके जवाब में भाजपा के एक नेता यह कहते हैं कि अगर झारखंड विधानसभा चुनाव भी लोक सभा चुनावों के साथ ही हुए तो छह महीने से भी कम का वक्त बचेगा और ऐसे में इस बीच अर्जुन मुंडा को चुनाव लड़ाने की बाध्यता नहीं रहेगी.
उधर, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की जगह कौन लेगा, इसे लेकर अभी भाजपा के अंदर स्थिति साफ नहीं है. क्योंकि हरियाणा में मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार हैं. पार्टी में यह चर्चा भी चल रही है कि कहीं खट्टर को हटाने के बाद प्रदेश भाजपा के नेताओं में आपसी टकराव इतना न बढ़ जाए कि स्थितियां बेकाबू हो जाएं और चुनावों में फायदा से अधिक नुकसान हो जाए. यही एक बात खट्टर के पक्ष में बताई जा रही है और कहा जा रहा है कि संभव है कि खट्टर को हटाने का निर्णय इस वजह से टल जाए.
हरियाणा को लेकर भाजपा यह निर्णय भी नहीं ले पा रही है कि यहां किसी जाट को मुख्यमंत्री बनाया जाए या किसी गैर जाट को. दोनों का अपना नफा-नुकसान है. हरियाणा में जहां हर पार्टी जाट मतदाताओं को सबसे अधिक तरजीह देती दिखती है, वहीं भाजपा ने अब तक इससे अलग राजनीतिक लाइन ली है. लेकिन अब इस पर पार्टी में पुनर्विचार चल रहा है.
कुल मिलाकर दोनों राज्यों में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर भाजपा के अंदर जो बातचीत चल रही है, उससे यह लगता है कि हरियाणा का निर्णय होने में भले ही कुछ देर लगे लेकिन झारखंड का निर्णय आने वाले कुछ दिनों में हो सकता है.
फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर हमसे जुड़ें | सत्याग्रह एप डाउनलोड करें