बुधवार को लोकसभा में सरोगेसी (किराए की कोख) नियामक विधेयक पारित हो गया. खबरों के मुताबिक यह विधेयक भारत में सरोगेसी के तेजी से बढ़ते व्यावसायिक और अनैतिक इस्तेमाल पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाया गया है. इस विधेयक में केंद्रीय स्तर पर राष्ट्रीय सरोगेसी बोर्ड जबकि राज्य स्तर पर ऐसे ही बोर्डों को गठित करके इनमें अधिकारियों की नियुक्ति का प्रावधान भी किया गया है. इसके अलावा यह नियामक विधेयक सिर्फ उन्हीं जोड़ों को सरोगेसी से संतान हासिल करने की इजाजत देगा जो खुद बच्चा नहीं जन सकते.

विधेयक के मुताबिक इसका फायदा वही जोड़े उठा पाएंगे जिनकी शादी कम से कम पांच साल बीत चुके हों और उस जोड़े में से कोई एक संतान जनने की स्थिति में न हो साथ ही वह भारतीय नागरिक होने की शर्त भी पूरी करता हो. इस विधेयक का एक पहलू यह भी है कि जो जोड़ा सरोगेसी से संतान प्राप्त करेगा उसके लिए सरोगेट मां की भूमिका निभाने वाली महिला उसकी निकट संबंधी होनी चाहिए साथ ही विधेयक में उसके विवाहित और पहले से ही किसी बच्चे की मां होने की शर्त भी शामिल की गई है.

उधर, इस विधेयक का प्रस्ताव रखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरोगेसी से संतान पाने वालों के लिए भारत को एक गढ़ के तौर पर देखा जाने लगा था. दुनियाभर में भारत के प्रति मजबूत होती इस धारणा में बदलाव लाने के लिए व्यावसायिक सरोगेसी पर रोक लगाया जाना जरूरी है. उन्होंने आगे कहा, ‘इस विधेयक का मकसद सरोगेसी के जरिए होने वाले भारतीय महिलाओं के शोषण को रोकना है.’