‘किसानों का कर्ज माफ करना समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं है.’  

— राजीव कुमार, नीति आयोग के उपाध्यक्ष

राजीव कुमार ने यह बात ‘स्ट्रेटेजी फॉर न्यू इंडिया एट 75’ नाम से नीति आयोग का एक दस्तावेज जारी करते हुए कही. उनके मुताबिक किसानों की कर्जमाफी की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है और केंद्र का इसमें कोई दखल नहीं बनता. उन्होंने आगे कहा कि अगर देश में ऐसे हालात होते कि कर्जमाफी जरूरी है तो केंद्र सरकार इस बारे में जरूर सोचती. इसके साथ ही राजीव कुमार ने राज्य सरकारों को सुझाव दिया कि उन्हें अपनी वित्तीय स्थिति को देखते हुए ही किसानों के कर्ज माफ करने के बारे में सोचना चाहिए.

‘मैं मानता हूं कि भारतीय जनता पार्टी के कुछ लोगों का कम बोलना चाहिए.’

— नितिन गडकरी, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री

नितिन गडकरी ने यह बात रिपब्लिक समिट के दौरान कही. इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया से बातचीत करते हुए नेताओं को कंजूसी के साथ शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए. नितिन गडकरी के मुताबिक नेताओं को मीडिया के साथ कम संवाद रखने की नीति पर चलना चाहिए और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं को इस नीति का अनुसरण करने की ज्यादा जरूरत है.


‘कांग्रेस ने सेना, सीएजी और उन सभी संस्थाओं को अपमानित किया है जो देश के लिए जरूरी हैं.’  

— नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

नरेंद्र मोदी ने यह बात भाजपा के तमिलनाडु के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कही. उन्होंने यह भी कहा कि रफाल सौदे पर कांग्रेस को शीर्ष अदालत का फैसला पसंद नहीं आया तो वह इसपर सवाल उठा रही है. इससे पहले ही कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने का प्रयास किया था. उन्होंने आगे कहा, ‘कांग्रेस व​ह पार्टी है जो चुनाव से पहले ईवीएम को लेकर शोर मचाती है और चुनाव में अच्छा प्रदर्शन रहने पर उसे स्वीकार भी कर लेती है.’


‘टाइपिंग की गलती एक-दो शब्दों तक तो समझ में आती है, लेकिन यहां तो पूरा पैराग्राफ ही गड़बड़ है.’  

— मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता

मल्लिकार्जुन खड़गे का यह बयान रफाल विमान सौदे पर केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट को सौंपे गए हलफनामे पर आया है. इसके साथ ही मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह भी कहा है कि रफाल सौदे की सही जानकारी तभी सामने आएगी जब संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सदस्य इससे संबंधित फाइलों की जांच करेंगे. उनके मुताबिक पूर्व सरकारों के कार्यकाल में बोफोर्स और 2जी स्पेक्ट्रम जैसे मुद्दों पर जेपीसी का गठन किया जा चुका है.