देश की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान सेवा प्रदाता कंपनी- पेटीएम पर भारतीय रिज़र्व बैंक ने इस साल अगस्त में रोक लगाई थी. और यह रोक क्यों लगाई गई इस बाबत द टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर से अब कहीं जाकर ख़ुलासा हुआ है. अख़बार ने ये कारण जानने के लिए सूचना के अधिकार (आरटीआई) का सहारा लिया. इसके तहत दायर अर्ज़ी के ज़वाब ने आरबीआई ने पेटीएम पर रोक के चार कारण बताए हैं.

आरबीआई ने अख़बार को बताया है कि पेटीएम ‘अपने ग्राहक को जाने’ (केवाइसी) नियमों का लगातार उल्लंघन कर रही थी. आरबीआई के मुताबिक कंपनी के संस्थापक विजय शेखर शर्मा की कंपनी- वन97 कम्युनिकेशंस और पेटीएम पेमेंट बैंक (पीपीबी) का संचालन करने वाली उसकी सहयोगी इकाई के आपसी संबंधों से भी वह पूरी तरह ख़ुश नहीं था. इस बैंक में 51 फ़ीसदी हिस्सेदारी शर्मा के पास है. जबकि बाकी वन97 कम्युनिकेशंस और उसकी सहयोगी कंपनियों के पास.

इसके अलावा पीपीबी प्रस्तावित नेटवर्थ की 100 करोड़ रुपए की सीमा को भी बरक़रार नहीं रख पाया. साथ ही भुगतान बैंकाें को हर रोज प्रति ख़ाता अधिकतम एक लाख रुपए तक ही अपने पास रोक कर रखने की इजाज़त हाेती है. पीपीबी ने इस नियम का भी पालन नहीं किया. इन्हीं कारणों से आरबीआई ने उसके संचालन पर रोक लगाई थी. ख़बर के मुताबिक आरबीआई की रोक की वज़ह से पीपीबी की तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रेणु सत्ती को इस्तीफ़ा भी देना पड़ा था.

अख़बार की मानें तो पहले आरबीआई ने इस आरटीआई का ज़वाब देने से साफ़ इंकार कर दिया था. इसकी वज़ह से उसे अपील दायर करनी पड़ी. तब कहीं जाकर आरबीआई ने अर्ज़ी पर विचार किया और रोक संबंधी चार कारण सार्वजनिक किए. हालांकि इस बाबत जब अख़बार ने पीपीबी के प्रवक्ता से प्रतिक्रिया लेनी चाही तो उन्होंने कोई ज़वाब नहीं दिया.