गुजरात के चर्चित सोहराबुद्दीन शेख़ फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले में शुक्रवार को अहम फ़ैसला आया है. इसके मुताबिक मामले के सभी 22 आरोपितों को अदालत ने बरी कर दिया है. मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने यह फ़ैसला सुनाया. इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के मौज़ूदा अध्यक्ष अमित शाह भी आराेपित थे. हालांकि वे पहले ही अदालत से बरी हो चुके हैं.

ख़बरों के मुताबिक विशेष सीबीआई अदालत के जज एसजे शर्मा ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपितों के ख़िलाफ़ पुख़्ता सबूत पेश करने में नाक़ाम रहा है. इसलिए सभी आरोपितों को दोषमुक्त किया जाता है. इन आरोपितों में 21 गुजरात और राजस्थान पुलिस के कनिष्ठ अधिकारी हैं. जबकि एक आरोपित उस फार्म हाउस का मालिक है, जहां सोहराबुद्दीन और उसकी पत्नी कौसर बी को मुठभेड़ में मारे जाने से पहले रखा गया था. सोहराबुद्दीन के साथ कौसर बी को भी 2005 में गुजरात और राजस्थान की पुलिस ने मिलकर मार गिराया था.

पुलिस विभाग के इन्हीं आरोपितों पर तुलसीराम प्रजापति को भी मुठभेड़ में मारने का आरोप था. अदालत ने उन्हें इस मामले में भी सबूत न होने के आधार पर बरी कर दिया. साेहराबुद्दीन के सहयोगी तुलसीराम को 2006 में मारा गया था. उसने आरोपितों को सोहराबुद्दीन और कौसर बी को जबरन पकड़कर ले जाते देखा था. ये दोनों नवंबर 2005 को जब हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली जाने वाली बस में सवार थे तभी उनको हिरासत में ले लिया गया था. इसके बाद दोनों को कुछ समय तक एक फार्म हाउस में रखा गया. फिर मार दिया गया.