ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरेसा मे 17 महीनों की लम्बी जद्दोजहद के बाद बीते महीने ब्रेक्जिट यानी ब्रिटेन के यूरोपीय संघ (ईयू) से अलग होने को लेकर अंतिम मसौदा तैयार करवाने में सफल हो गईं. इसके बाद इस मसौदे को उनकी कैबिनेट ने भी हरी झंडी दिखा दी. अब आगे की कार्रवाई यूरोपीय संघ में तब होगी जब यह मसौदा ब्रिटेन की संसद में पारित हो जाएगा. बीते 11 दिसंबर को इसे संसद में पारित कराया जाना था. लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी इसके पारित न होने की आशंका के चलते टेरेसा मे ने अंतिम समय में मसौदे पर होने वाला संसदीय मतदान टाल दिया.

बताया जाता है कि विपक्षी लेबर पार्टी के सांसदों के साथ-साथ सत्ताधारी कंजर्वेटिव पार्टी के सौ से ज्यादा सांसदों को यह ब्रेक्जिट मसौदा पसंद नहीं है. इनका कहना है कि इस मसौदे में कई बदलाव किए जाने की जरूरत है और जब तक ये बदलाव नहीं होंगे इसे संसद में पारित नहीं होने दिया जाएगा. उधर, यूरोपीय संघ (ईयू) ने भी ब्रिटिश प्रधानमंत्री से साफ़ शब्दों में कह दिया है कि यह मसौदा अंतिम है और अब उससे किसी तरह की रियायत की उम्मीद न की जाए.

ऐसे में सवाल यह उठता है कि टेरेसा मे द्वारा ईयू के साथ किए गए ब्रेक्जिट समझौते में आखिर ऐसा क्या है जिसे मानने के लिए ब्रिटेन के दोनों पक्षों के सांसद तैयार नहीं हैं और इससे पीछे हटने के लिए ईयू. इस मामले पर नजर रखने वाले जानकार इसकी सबसे बड़ी वजह ब्रेक्जिट मसौदे में शामिल की गई उस ‘बैकस्टॉप पॉलिसी’ को बताते हैं जिसके तहत ब्रिटेन को ब्रेक्जिट के बाद भी ईयू की कई शर्तें माननी होंगी.

‘बैकस्टॉप पॉलिसी’ क्या है?

जानकारों की मानें तो ब्रिटेन 29 मार्च, 2019 को ईयू से अलग हो जाएगा. लेकिन, इसके बाद भी उसे कई मसलों को सुलझाने के लिए ईयू से बातचीत करनी होगी. इस बातचीत के लिए एक ट्रांजिशन पीरियड दिया गया है जिसकी शुरुआती समयावधि दिसंबर 2020 तक है. इसका मतलब है कि इस ट्रांजिशन पीरियड के दौरान यानी 2020 के अंत तक ब्रिटेन और ईयू को सभी मसले सुलझाने होंगे.

ब्रेक्जिट मसौदे में शामिल की गई ‘बैकस्टॉप पॉलिसी’ कहती है कि ट्रांजिशन पीरियड के दौरान ब्रिटेन को ईयू की कई शर्तें माननी होंगी. इन शर्तों के मुताबिक ट्रांजिशन पीरियड में ब्रिटेन ईयू के ‘कस्टम यूनियन’ का सदस्य बना रहेगा. ‘कस्टम यूनियन’ में रहने का मतलब है कि यूरोपीय संघ में शामिल सभी देशों की सीमाएं ब्रिटिश माल-सामान की आवाजाही के लिए खुली रहेंगी. कोई शुल्क, कोई चुंगी नहीं देनी पड़ेगी. साथ ही ब्रिटेन को ‘कस्टम यूनियन’ के सभी नियमों को मानना होगा.

इसके अलावा ट्रांजिशन पीरियड के दौरान ब्रिटेन के राज्य उत्तरी आयरलैंड और पड़ोसी देश आयरलैंड गणराज्य के बीच सीमा पहले की तरह खुली रहेगी. साथ ही उत्तरी आयरलैंड ईयू की एकल बाजार प्रणाली से भी बंधा रहेगा. ईयू की एकल बाजार प्रणाली में रहने का मतलब यह हुआ कि उत्तरी आयरलैंड में बनने वाले उत्पाद ईयू द्वारा निर्धारित मानकों का पालन करेंगे.

ट्रांजिशन पीरियड बढ़ता रहेगा

ब्रेक्जिट मसौदे के मुताबिक ट्रांजिशन पीरियड की शुरूआती समयावधि दिसंबर 2020 तक होगी. लेकिन, अगर 2020 तक ईयू और ब्रिटेन के बीच मसले नहीं सुलझते तो इस ट्रांजिशन पीरियड की समयावधि को कुछ और सालों के लिए आगे बढ़ा दिया जाएगा. मसौदे में यह भी कहा गया है कि ट्रांजिशन पीरियड और बैक स्टॉप की शर्तों से ब्रिटेन को तभी निजात मिलेगी जब मसलों को सुलझाने के लिए हो रही बातचीत किसी नतीजे पर पहुंच जाएगी. ब्रेक्जिट मसौदे में एक शर्त यह भी है कि ब्रिटेन लाख चाहने के बाद भी एकतरफ़ा ढंग से कभी ट्रांजिशन पीरियड का अंत नहीं कर सकेगा और न ही बैक स्टॉप की शर्तों को मानने से इंकार कर सकेगा.

सबसे पेचीदा मसला

ट्रांजिशन पीरियड में ईयू और ब्रिटेन के बीच जिन मसलों पर बात होनी है, उनमें सबसे प्रमुख मसला आयरलैंड गणराज्य और उत्तरी आयरलैंड की सीमा का है. ईयू, आयरलैंड गणराज्य और ब्रिटेन तीनों चाहते हैं कि यह सीमा खुली रहे, लेकिन ब्रेक्जिट के बाद इस सीमा को खुला रखने का प्रारूप क्या होगा, इस पर अभी बातचीत अटकी हुई है. जानकारों की मानें तो यह मसला बहुत ही पेचीदा है और इस पर जल्द सहमति बनना आसान नहीं होगा.

‘बैकस्टॉप पॉलिसी’ से ब्रिटेन के लोगों को क्या दिक्क्त है?

‘बैकस्टॉप पॉलिसी’ के तहत दी गईं शर्तें ब्रिटेन के उन लोगों को बिलकुल भी रास नहीं आ रही हैं जो यूरोपीय संघ से एक ही झटके में अलग होने की उम्मीद पाले थे. उनका मानना है कि ऐसे में उनका देश यूरोपीय संघ से अलग होकर भी उसके कई नियमों-क़ानूनों से बंधा रहेगा. कुछ लोगों का यह भी मानना है कि यूरोपीय संघ ने ट्रांजिशन पीरियड की कोई एक निश्चित समयावधि इसलिए तय नहीं की है क्योंकि वह मसलों को सुलझाना ही नहीं चाहता. इन लोगों को डर है कि यूरोपीय संघ ब्रिटेन को अपने बंधन से शायद कभी भी मुक्त नहीं होने देगा और ट्रांजिशन पीरियड को आगे बढ़ाता रहेगा. ऐसे में ब्रिटेन को अन्य देशों से मुक्त व्यापार समझौते न कर पाने जैसी तमाम मुश्किलों का भी सामना करना पड़ेगा.

बैकस्टॉप पॉलिसी की उन शर्तों पर भी काफी लोगों को दिक्क्त है जिनमें उत्तरी आयरलैंड को ईयू की एकल बाजार प्रणाली में रखने की बात कही गई है. इन लोगों का कहना है कि ऐसे में 29 मार्च, 2019 को ब्रिटेन के ईयू से बाहर होने के बाद भी उसके एक राज्य-उत्तरी आयरलैंड में उत्पाद बनाने के लिए ईयू के मानकों का पालन करना पड़ेगा, जबकि अन्य क्षेत्र ब्रिटेन सरकार के मानकों का पालन करेंगे. ऐसे में ब्रिटेन से उत्तरी आयरलैंड या ईयू सदस्य देशों को जाने वाले उत्पादों की नियमित जांच उत्तरी आयरलैंड और ब्रिटेन के बीच में होगी.

संसद में टेरेसा मे के सहयोगी ‘डेमोक्रेटिक यूनियनिस्ट पार्टी’ के नेताओं सहित एक बड़ा तबका यह कहते हुए इसका विरोध कर रहा है कि यह उत्तरी आयरलैंड के ब्रिटेन से अलग होने की शुरुआत जैसा होगा. इनका यह भी कहना है कि इससे उन अलगाववादियों के हौसले बढ़ेंगे, जो उत्तरी आयरलैंड को ब्रिटेन से अलग कर आयरलैंड गणराज्य में विलय करवाने की मंशा पाले हुए हैं.