वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह ने राजकोषीय लक्ष्य हासिल करने में चूक को लेकर चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि इसका देश के स्थिर वृहद आर्थिक परिदृश्य और निवेश पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा. वित्त आयोग की यह टिप्पणी मध्य प्रदेश और राजस्थान समेत कुछ राज्यों द्वारा किसानों की कर्ज माफी का फैसला लिए जाने के बाद आई है. सिंह ने आशंका जताई कि कुछ राज्य राजकोषीय लक्ष्य की प्राथमिकता के अनुरूप नहीं चल रहे हैं. उन्होंने कहा कि पहले ऐसा नहीं था.

पीटीआई की खबर के मुताबिक दिल्ली में आयोजित एक सम्मेलन में एक सत्र को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि संस्थागत तंत्रों के माध्यम से केंद्र और राज्य के संबंधों को मजबूत किया जाना चाहिए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार को श्रम, भूमि और पूंजी जैसे उत्पादन कारकों से जुड़ी सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के तौर-तरीकों पर गौर करना चाहिए.

वहीं, कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन विवेक देबरॉय ने कहा कि देश की आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए सभी संस्थागत संरचनाओं का फिर से निरीक्षण करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि भारत में प्रति व्यक्ति आय 2,000 डॉलर (एक लाख 40 हजार रुपये से ज्यादा) के स्तर पर पहुंच रही है और अभी यह और आगे बढ़ेगी, लेकिन इसमें अभी भी चुनौतियां बरकरार है. देबरॉय ने कहा, ‘भारत की प्रति व्यक्ति आय और बढ़ेगी. यहां 2030 या 2040 तक बदलाव आएगा लेकिन, सभी का कहना है कि भारत तब भी तुलनात्मक रूप से गरीब देश बना रहेगा.’