अफगानिस्तान की संसद पर तालिबान का हमला | सोमवार, 22 जून 2015
अफगानिस्तान की संसद पर हुए एक आतंकी हमले में पांच लोग मारे गए और 12 से ज्यादा घायल हो गए. हमले के बाद हरकत में आए अफगानी सुरक्षाबलों ने इसे अंजाम देने वाले सातों तालिबानी आतंकियों को ढेर कर दिया. यह हमला उस वक्त हुआ जब संसद की कार्रवाई चल रही थी. इस दौरान आतंकियों ने संसद परिसर के बाहर और भीतर कई धमाके किए. हालांकि इस हमले में किसी भी सांसद को चोट नहीं आई, लेकिन इसके चलते संसद की इमारत को काफी नुकसान पहुंचा. बाद में तालिबान ने इस हमले की जिम्मेदारी ली. अफगानिस्तान में कुछ समय पहले ही चुनाव हुए थे. जानकार इस हमले को नई सरकार की शांति बहाली की कोशिशों के लिए बड़ा झटका बता रहे हैं.
लश्कर आतंकी लखवी के बचाव में उतरा चीन | मंगलवार, 23 जून 2015
मुंबई हमले के मुख्य साजिशकर्ता और लश्कर ए तैयबा के कमांडर जकीउर रहमान लखवी को फिर से सलाखों के पीछे पहुंचाने की भारत की कोशिशों पर चीन ने अड़ंगा लगा दिया. उसने इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधों से संबंधित समिति के सामने उठाई गई भारत की मांग पर यह कहकर आपत्ति जताई कि लखवी के बारे में भारत के पास पर्याप्त सूचना नहीं है. भारत ने इस समिति से अनुरोध किया था कि वह एक बैठक करके पाकिस्तान से अपने नागरिक लखवी की रिहाई के संबंध में सफाई मांगे. भारत ने लखवी की रिहाई को अंतर्राष्ट्रीय प्रावधानों का उल्लंघन बताते हुए मांग की थी कि उसे फिर से जेल में डाल दिया जाए. लेकिन इसके तुरंत बाद चीनी अधिकारियों ने इस मांग पर आपत्ति जता दी. लखवी को 26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई हमलों को अंजाम देने के आरोप में उसी साल दिसंबर में गिरफ्तार किया गया था. लेकिन इस साल नौ अप्रैल को पाकिस्तान की एक अदालत ने उसे जमानत दे दी.
सूडान में सेना ने बर्बरता की सारी हदें लांघी | बुधवार, 24 जून 2015
लंबे समय से गृह युद्ध की मार झेल रहे अफ्रीकी देश सूडान को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने बेहद वीभत्स रिपोर्ट जारी की. इसके मुताबिक सैनिकों ने इस देश में बर्बरता  की सारी हदें लांघ दी हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 18 महीनों के दौरान सैकड़ों बच्चों को मौत के घाट उतार देने के अलावा सैनिकों ने नाबालिग लड़कियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म की कई घटनाओं को अंजाम दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक अकेले पिछले महीने ही लगभग डेढ़ सौ बच्चों को मारा जा चुका है. इस मारकाट के लिए सूडान पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और साउथ सूडान लिबरेशन आर्मी के सैनिकों को जिम्मेदार बताया गया है. रिपोर्ट में विद्रोहियों द्वारा बड़े पैमाने पर बच्चों की भर्ती किए जाने को लेकर भी चिंता जताई गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वक्त 13 हजार से ज्यादा बच्चों का इस्तेमाल युद्ध संबंधी गतिविधियों में किया जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि दुनियाभर के अमन पसंद देशों को सामूहिक जिम्मेदारी लेते हुए जल्द ही इस संकट का हल तलाशना होगा.
नाराज फ्रांस को मनाने में जुटा अमेरिका | गुरुवार, 25 जून 2015
अपने राष्ट्रपतियों की जासूसी की खबरों पर नाराजगी जता चुके फ्रांस को मनाने के लिए ओबामा ने फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद से फोन पर बातचीत करके उन्हें भरोसा दिलाया कि अमेरिका ने ऐसा कोई काम नहीं किया है. व्हाइट हाउस ने उनके और ओलांद के बीच हुई बातचीत का ब्यौरा देते हुए बताया कि ओबामा ने फ्रांस के साथ द्विपक्षीय समझौतों को लेकर प्रतिबद्धता जताते हुए साफ किया है कि अमेरिका फ्रांस को किसी भी तरह से निशाना नहीं बनाएगा. ओबामा और ओलांद के बीच यह बातचीत खुफिया जानकारी लीक करने वाली वेबसाइट विकीलीक्स के उस सनसनीखेज खुलासे के बाद हुई जिसके मुताबिक अमेरिका ने साल 2006 से 2013 के बीच फ्रांस के तीन राष्ट्रपतियों समेत कई अन्य नेताओं और राजनयिकों की जासूसी करवाई थी. इस खुलासे से नाराज फ्रांस ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए भविष्य में ऐसा करने से बाज आने को कहा था.
दो घंटे के भीतर तीन देशों में आईएस का आतंकी हमला, 50 से ज्यादा की मौत | शुक्रवार, 26 जून 2015
फ्रांस, कुवैत और ट्यूनीशिया में हुए अलग-अलग आतंकी हमलों में 50 से ज्यादा लोग मारे गए. इन तीनों ही हमलों को आतंकी संगठन आईएस ने अंजाम दिया. हमलों की शुरुआत फ्रांस के दूसरे सबसे बड़े शहर लियोन से हुई जहां स्थित एक गैस फैक्ट्री को आतंकियों ने निशाना बनाया. इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई. इसके बाद आतंकियों ने कुवैत के अल सवाबोर में एक मस्जिद में उस वक्त आत्मघाती हमला किया जब वहां जुमे की नमाज पढी जा रही थी. इस हमले में 25 लोग मारे गए. अंतिम हमला ट्यूनीशिया के सॉउसी शहर स्थित एक होटल में हुआ. आतंकियों ने होटल के अंदर घुसकर अंधाधुंध गोलियां दागते हुए 27 लोगों को मौत के घाट उतार दिया.
अब पूरे अमेरिका में वैध होंगी समलैंगिक शादियां | शनिवार, 27 जून 2015
अमेरिका में समलैंगिक शादियों की वैधता पर सालों से चली आ रही बहस पर फिलहाल विराम लग गया है. अमेरिका के सुप्रीमकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि अब पूरे देश में समलैंगिक शादियां वैध मानी जाएंगी. अभी तक अमेरिका 14 राज्यों में समलैंगिक शादियां गैरकानूनी थीं लेकिन अब यह प्रतिबंध अपने आप खत्म हो गया है. इस फैसले में जस्टिस एंथनी केनेडी ने लिखा, ‘याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि उन्हें कानून की नजर में बराबरी का दर्जा दिया जाए और संविधान उन्हें यह अधिकार देता है.’ अमेरिका के राष्ट्रपति ने इस फैसले को अमेरिका की जीत बताते हुए कहा, ‘जब सभी अमेरिकियों के साथ बराबरी का व्यवहार होता है तब हमें और अधिक स्वतंत्रता मिलती है.’ दूसरी तरफ ईसाई रूढ़िवादियों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की आलोचना की. अमेरिका में मैसाच्युसेट्स पहला राज्य था जिसने 2004 में समलैंगिक शादियों को मान्यता दी. उसके बाद से इस मुद्दे पर कई अदालती फैसले आए.