संयुक्त राष्ट्र यमन के रणनीतिक तौर पर अहम बंदरगाह शहर हुदयदाह में युद्धविराम की नाजुक स्थिति पर नजर रखने के लिए पर्यवेक्षकों की तैनाती करेगा. शुक्रवार को कई घंटों की चर्चा के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इससे जुड़े एक प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी.

पीटीआई के मुताबिक सुरक्षा परिषद में यह प्रस्ताव ब्रिटेन की ओर से रखा गया था जिसे 15 सदस्यों ने कुछ संशोधनों के साथ पारित कर दिया. इस प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया है कि हुदयदाह में हुए संघर्ष विराम का सभी पक्ष सम्मान करेंगे और इस स्थिति को बनाए रखने के लिए यूएन की ओर से हर संभव प्रयास किए जाएंगे. संयुक्त राष्ट्र में सऊदी अरब के प्रतिनिधि खालिद मंज़ालवी ने कहा कि उनका देश इस प्रस्ताव का स्वागत करता है.

बीते हफ्ते स्वीडन में यमन को लेकर यूएन की मध्यस्थता में एक बैठक हुई थी. इस बैठक में यमन में लड़ने वाले दोनों पक्ष यानी सऊदी अरब के समर्थन वाले गुट और हूती शिया विद्रोही भी शामिल हुए थे. इस दौरान दोनों पक्ष एक शांति समझौते पर सहमत हुए. इस समझौते के तहत यमन में दोनों विरोधी पक्ष संघर्षविराम का पालन करेंगे. दोनों ही हुदयदाह से अपने लड़ाकों को हटाएंगे और देश में भुखमरी के मुहाने पर जी रहे लाखों लोगों तक सहायता और खाद्य सामग्री पहुंचाने में मदद करेंगे.

मंगलवार से अमल में आ चुके इस समझौते में कैदियों की अदला-बदली की भी योजना है, जिसमें करीब 15 हजार कैदियों की अदला-बदली हो सकती है.

बीते हफ्ते हुए इस शांति समझौते को पूरी दुनिया यमन में शांति स्थापित करने के एक बड़े मौके की तरह देख रही है. माना जा रहा है कि अगर यमन में सऊदी अरब की अगुवाई वाले गुट और हूती शिया विद्रोहियों के बीच यह संघर्षविराम लंबा चला तो वहां चार साल से जारी संघर्ष पूरी तरह खत्म हो सकता है. यही वजह है कि यूएन इस संघर्ष विराम को लेकर काफी ज्यादा गंभीर है.