इंडोनेशिया के सुंदा जलसंधि में शनिवार रात ज्वालामुखी फटने के बाद आई सुनामी में मरने वालों की संख्या 222 हो गई है जबकि 800 से ज्यादा लोग घायल हो गए.

पीटीआई के मुताबिक इंडोनेशिया की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के प्रवक्ता सुतोपो नुग्रोहो ने बताया कि शनिवार रात साढ़े नौ बजे अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी फटने के कुछ देर बाद दक्षिणी सुमात्रा और पश्चिमी जावा के समुद्री क्षेत्र में सुनामी आ गई. प्रवक्ता के मुताबिक समुद्र से उठने वाली लहरों की ऊंचाई करीब 15 से 20 मीटर थी जिनसे देखते ही देखते सैकड़ों मकान तबाह हो गए. सुनामी का सबसे ज्यादा प्रभाव जावा के पांडेंगलांग क्षेत्र में पड़ा है.

अंतरराष्ट्रीय सुनामी सूचना केन्द्र इस घटना से सकते में है. उसके अनुसार ज्वालामुखी के फटने से सुनामी की घटना दुर्लभ है. संभवत: यह जल के विशाल क्षेत्र के अचानक विस्थापन या ‘स्लोप फेल्यर’ के चलते आई होगी.

इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान एवं भूभौतिकी एजेंसी के वैज्ञानिकों का कहना है कि अनाक क्राकाटोआ ज्‍वालामुखी के फटने के बाद समुद्र के नीचे तीव्र हलचल हुई होगी और यही सुनामी आने का कारण रहा होगा. हालांकि, इन वैज्ञानिकों ने लहरों के उफान का कारण पूर्णिमा के चंद्रमा को भी बताया.

अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता से करीब 200 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है. 305 मीटर ऊँचा यह ज्वालामुखी इस साल जून से ही फटना शुरू हो गया था. अधिकारियों ने इससे दो किलोमीटर तक के क्षेत्र को प्रतिबंधित जोन घोषित कर लोगों को वहां नहीं जाने का परामर्श जारी किया था.

मौसम विज्ञान एवं भूभौतिकी एजेंसी के वैज्ञानिकों के मुताबिक अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी में बीते कुछ दिनों से राख उठने की वजह से कुछ हरकत होने के संकेत मिल रहे थे. लेकिन, इससे सुनामी आने की बिलकुल भी आशंका नहीं थी.

इससे पहले, 26 दिसंबर 2004 को पश्चिमी सुमात्रा तट के पास समुंद्र में 9.3 तीव्रता के भूकंप के बाद आयी सुनामी के कारण हिंद महासागर के आसपास के देशों में दो लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गयी थी. तब इंडोनेशिया में मरने वालों की संख्या डेढ़ लाख से ज्यादा थी.