हिंदू भगवान हनुमान की जाति-धर्म को लेकर दिनोंदिन बढ़ती सियासी बहस पर संत समुदाय ने नाराजगी जाहिर की है. उनका कहना है कि भगवान शंकर के अवतार माने जाने वाले गदाधारी हिंदू देवता हनुमान के बारे में अनर्गल टिप्पणियां बंद होनी चाहिए. खबर के मुताबिक साधु-संतों के 13 अखाड़ों की शीर्ष संस्था अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने आज पीटीआई-भाषा से कहा, ‘जो अज्ञानी राजनेता बजरंग बली की जाति-धर्म को लेकर अनुचित बयानबाजी कर रहे हैं, वे अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं. उन्हें अपने दिमाग का इलाज कराना चाहिए. हनुमान भगवान शंकर के रुद्रावतार हैं. भगवान को जातियों में नहीं बांटा जा सकता. उचित होगा कि अब इस सिलसिले में सियासी बयानबाजी बंद कर दी जाए.’

उधर, भगवान हनुमान को ‘दलित’ बताकर विवादास्पद बयानबाजी की शुरुआत करने वाले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कंप्यूटर बाबा ने चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि अगर योगी ने बजरंग बली को लेकर अपनी आपत्तिजनक टिप्पणी पर माफी नहीं मांगी, तो संत समुदाय उनके खिलाफ मोर्चा खोल देगा. एजेंसी के मुताबिक कंप्यूटर बाबा ने कहा, ‘भगवान हनुमान पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर योगी आदित्यनाथ ने हद पार कर दी है. उन्हें बजरंग बली के साथ सनातन हिंदू धर्म के मतावलंबियों से भी माफी मांगनी चाहिए, वर्ना हम उनके विरुद्ध अदालत की शरण में जाएंगे. संत समुदाय उनके खिलाफ आंदोलन और अनशन करेगा, सो अलग.’

इसके अलावा साधु-संतों के किन्नर अखाड़े की प्रमुख लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने भी बजरंग बली की जाति-धर्म को लेकर सियासी बयानबाजी पर नाराजगी जताई है. त्रिपाठी ने कहा, ‘यह बेहद शर्मनाक बात है कि राजनेता अपनी दुकान चलाने के लिए बजरंग बली पर लगातार अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं. देवी-देवताओं को राजनीति से परे रखा जाना चाहिए, क्योंकि ईश्वर के अवतारों की कोई जाति नहीं होती.’