छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने राज्य में बस्तर जिले के लोहंडीगुड़ा इलाके की वह जमीन आदिवासी किसानों को लौटाने का फैसला किया है जिसे 2005 में टाटा स्टील की एक परियोजना के लिए अधिग्रहीत किया गया था. स्क्रॉल डॉट इन ने राज्य सरकार के एक अधिकारी के हवाले से लिखा है कि इस संबंध में राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं. साथ ही कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद आदिवासियों जमीन वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी.

पहचान जाहिर न करने की शर्त पर एक अन्य अधिकारी ने बताया है, ‘कैबिनेट की बैठक जल्दी ही होगी और माना जा रहा है कि बैठक के पहले ही दिन इस बाबत मंजूरी भी दे दी जाएगी. अगर ऐसा हुआ तो यह एक ऐतिहासिक फैसला होगा क्योंकि पूरे देश में इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ है कि सरकार द्वारा अधिग्रहीत जमीन किसानों को वापस लौटाई गई हो. यहां तक कि ऐसा पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और सिंगूर में भी नहीं हुआ.’

इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली प्रदेश की पूर्व सरकार ने 2005 में टाटा स्टील के साथ एक साथ एक सहमति पत्र पर दस्तखत किए थे. इसके तहत 19,500 करोड़ रुपये की लागत से बस्तर जिले में एक एकीकृत स्टील प्लांट लगाया जाना था. इस प्लांट के लिए दस गांवों से 2,044 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया था. हालांकि साल 2016 में कंपनी ने इस परियोजना से अपने हाथ खींच लिए थे.

टाटा स्टील के उस फैसले के बाद कांग्रेस ने तत्कालीन सरकार से आदिवासी किसानों को उनकी जमीन वापस लौटाने की मांग की थी. हालांकि तब भाजपा सरकार ने दावा किया था कि जमीन छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सीएसआईडीसी) ने अधिग्रहीत की है इसलिए उसे उसके असली मालिकों को नहीं लौटाया जा सकता. उधर, छत्तीसगढ़ में हाल के चुनाव के लिए प्रचार के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक सभा को संबोधित करते हुए प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने पर किसानों को उनकी जमीन लौटाए जाने का वादा किया था.