सरकारी बैंकों के लगभग 10 लाख कर्मचारी आज हड़ताल पर हैं. यह हड़ताल यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने बुलाई है. यूनियन का दावा है कि 21 सरकारी बैंकों के कर्मचारियों और अधिकारियों के अलावा कुछ पुराने निजी बैंक भी, जो यूएफबीयू के सदस्य हैं, हड़ताल पर रहेंगे. यह हड़ताल विजया बैंक, देना बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के विलय के प्रस्ताव और बैंककर्मियों के वेतन में आठ प्रतिशत की वृद्धि के विरोध में बुलाई है.

इंडिया टुडे के मुताबिक इस हड़ताल में नौ बैंक यूनियन शामिल हैं. इनमें ऑल इंडिया बैंक एसोसिएशन (एआईबीए) और नेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स (एनओबीडब्लू) भी शामिल हैं. एनओबीडब्लू के उपाध्यक्ष अश्विनी राणा ने बताया कि सरकार उनकी मांगों को मान नहीं रही है. इसीलिए ये फैसला लिया गया है. उन्होंने बताया कि बैंककर्मियों की मांग है कि उनके वेतन में 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होनी चाहिए. उनकी वेतन वृद्धि नवंबर-2017 से बकाया है. जबकि इंडियन बैंक्स एसोसिएशन ने वेतन में आठ प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है. ये बैंक कर्मचारी संघों को मंजूर नहीं है.

यूनियन का यह भी मानना है कि बैंकों की समस्या विलय से नहीं सुलझ सकती है. बैंकों की सबसे बड़ी समस्या फंसा हुआ कर्ज (एनपीए) है. तीनों बैंकों का एनपीए करीब 80 हजार करोड़ रुपए हैं. विलय के बाद इस राशि को वसूलने में काफी परेशानी होगी. विलय से बैंकों के काम करने की क्षमता भी प्रभावित होगी. ग्राहकों की परेशानी बढ़ जाएगी.

बैंक कर्मचारियों की यह पिछले पांच दिन में दूसरी हड़ताल है. इससे पहले एआईबीओसी से जुड़े कर्मचारी शुक्रवार को हड़ताल पर थे. शनिवार और रविवार को अवकाश के बाद सोमवार को बैंक खुले. लेकिन मंगलवार को क्रिसमस की छुट्टी के बाद बुधवार को एक बार फिर से बैंककर्मी हड़ताल पर हैं. ऐसे में बैंक के ग्राहकों को काफी परेशानी हो सकती है.