देश के किसानों की नाराज़गी का मसला केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार काे लगातार परेशान कर रहा है. पांच राज्यों (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिज़ाेरम) में भारतीय जनता पार्टी के ख़राब प्रदर्शन के पीछे ये बड़ी वज़ह बताई जा रही है. इससे भी मोदी सरकार की परेशानी बढ़ी है क्योंकि अगले चार महीने बाद ही उसे लोक सभा चुनाव का सामना करना है. ऐसे में अब ख़बर है कि मोदी सरकार किसानों की नाराज़गी कम करने के लिए गंभीरता से कुछ कदम उठाने पर विचार कर रही है. द इकॉनॉमिक टाइम्स के अनुसार एक फरवरी को पेश होने वाले मोदी सरकार के अंतिम बजट और उसके आगे-पीछे ये कदम सार्वजनिक हो सकते हैं.

अख़बार के मुताबिक मोदी सरकार जिन कदमों पर विचार कर रही है कि उसमें एक तो ये है कि किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत मिलने वाले अनुषांगिक कर्ज़ (इसमें कर्ज़दार को कुछ भी बैंक के पास बंधक नहीं रखना पड़ता) की सीमा दोगुनी कर दी जाए. यह फिलहाल एक लाख रुपए है और दाे लाख रुपए तक हो सकती है. इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाय) में भी कुछ संशोधन हो सकते हैं. ये इस तरह किए जा सकते हैं कि और अधिक संख्या में किसान इसके दायरे में आ सकें. साथ ही उनके बीमा दावों का निपटारा भी तेजी से हो सके. एक वरिष्ठ अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर इसकी पुष्टि करते हैं.
उनके मुताबिक नीति आयोग कृषि और वित्त सहित सभी संबंधित मंत्रालयों से इस बाबत विचार-विमर्श में लगा है. विमर्श प्रक्रिया में किसानों का कर्ज़ माफ़ करने पर भी विचार किया जा रहा है. साथ ही किसानों से जुड़ी चिभिन्न योजनाओं में ढांचागत बदलावों पर भी. इनमें एक अहम ये भी है कि केसीसी कार्ड को रुपे एटीएम-डेबिट कार्ड में तब्दील कर दिया जाए. इस संबंध में केंद्र सरकार बैंकों से बातचीत कर रही है. ग़ौरतलब है कि देश में इस वक़्त लगभग चार करोड़ केसीसी खाते हैं. इन पर 2.37 लाख करोड़ रुपए का बकाया है. यही वज़ह है कि बैंक अभी केसीसी में अनुषांगिक कर्ज़ (कॉलेटरल फ्री लोन) की सीमा बढ़ाने से हिचक भी रहे हैं.
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के स्वतंत्र निदेशक रहे एमपी शोरावाला कहते भी हैं, ‘सरकार को केसीसी में अनुषांगिक कर्ज़ की सीमा को दोगुनी करने के बज़ाय उन किसानों की मदद करने पर विचार करना चाहिए जो कर्ज़ चुका रहे हैं. उन्हें वित्तीय सहायता या ब्याज़ माफ़ी दी जा सकती है. ताकि वे और उनके साथ अन्य किसान भी कर्ज़ चुकाने के लिए प्रोत्सहित हों. कर्ज़ माफ़ी या केसीसी में अनुषांगिक कर्ज़ की सीमा बढ़ाने जैसे कदमों से तो बैंकिंग व्यवस्था पर बोझ ही बढ़ेगा.’
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