भारतीय जनता पार्टी की तरह गठबंधन के दलों को साधने की दिक्क़त कांग्रेस के सामने भी पेश आ रही है. ख़बरों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की नाराज़गी के बाद अब कर्नाटक में कांग्रेस की साझीदार जेडीएस (जनता दल-सेकुलर) भी नाराज़ है. उसने अगला लोक सभा चुनाव अकेले लड़ने का संकेत दिया है.

जेडीएस के प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने बुधवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, ‘अभी हमने कोई फ़ैसला (लोक सभा चुनाव में गठबंधन के बाबत) नहीं किया है. मैं अपने ऊपर कोई आरोप भी नहीं लेना चाहता. लेकिन इतना ज़रूर कहूंगा कि यह सब (गठबंधन) इस पर निर्भर करेगा कि कांग्रेस हमारे साथ कितने सम्मानजनक तरीके से व्यवहार करती है.’ याद दिला दें कि कर्नाटक में जेडीएस इस समय कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार चला रही है. हालांकि उसकी सीटें कांग्रेस की तुलना में आधी से भी कम हैं. फिर भी कांग्रेस ने समझौते के तहत मुख्यमंत्री पद जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी को दे रखा है.

हालांकि दूसरी तरफ ख़बरें ये भी हैं कि कांग्रेस कई मामलों में जेडीएस और यहां तक कि मुख्यमंत्री को भी दरकिनार कर फ़ैसले ले रही है. जैसे उसने हाल ही में विभिन्न निगम-मंडलों के प्रमुखों की नियुक्ति की घोषणा की है. इनमें कई निगम-मंडल ऐसे विभागाें से संबद्ध हैं जिनका मंत्रालय जेडीएस के मंत्रियाें के पास है. इसी तरह कांग्रेस ने अपने एक नेता को मुख्यमंत्री कुमारस्वामी का राजनीतिक सचिव बनाने की भी घोषणा की है. इस सबसे जेडीएस का नेतृत्व नाराज़ है. इसी के बाद जेडीएस प्रवक्ता रमेश बाबू ने साफ कहा है, ‘हम देख रहे हैं कि कांग्रेस बड़े भाई की तरह व्यवहार कर रही है. इसीलिए हमारे नेता-कार्यकर्ता चाहते हैं कि पार्टी को राज्य की सभी 28 लोक सभा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए.’