मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण (तीन तलाक) विधेयक लोकसभा में पारित हो गया है. खबरों के मुताबिक इस विधेयक के पक्ष में 245 जबकि विपक्ष में 11 वोट पड़े. इससे पहले इस विधेयक को लेकर सरकार और विपक्षी दलों के सांसदों के बीच लंबी बहस हुई. साथ ही विधेयक में कुछ संशोधनों की मांग करते हुए कांग्रेस और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के सांसद इस पर वोटिंग कराए जाने से पहले ही सदन से वॉकआउट कर गए. उधर, विधेयक के पारित होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी.

इससे पहले केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सदन में यह विधेयक पेश करते हुए इसे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने वाला बताया था. साथ ही उनका यह भी कहना था कि पाकिस्तान सहित 20 इस्लामिक देशों ने तीन तलाक की प्रथा को बंद कर दिया है, ऐसे में भारत को भी इस दिशा में बढ़ना चाहिए. हालांकि लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे सहित पार्टी के कई अन्य नेताओं ने इस विधेयक को ज्वाइंट सिलेक्ट कमेटी के पास भेजे जाने की मांग करते हुए इस पर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट तलब किए जाने का अनुरोध भी किया.

उधर, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस विधेयक को किसी हाल में मंजूर न किए जाने वाला बताया तो वहीं मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (माकपा) के सांसद मोहम्मद सलीम ने इसे, ‘मुस्लिम पु​रुषों के खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला विधेयक कहा.’ शिव सेना ने इस विधेयक का समर्थन किया. इसके साथ ही सदन में चर्चा के दौरान पार्टी नेता अरविंद सावंत ने कहा कि तीन तलाक की तरह राम मंदिर के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार को हिम्मत दिखानी चाहिए.

इस दौरान भाजपा नेता व अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि जो लोग देश में फतवों की दुकान खोले बैठे हैं उसे बंद किया जाना चाहिए. देश कानून से चलता है फतवों से नहीं. उनके मुताबिक देश में सती प्रथा और बाल विवाह के समर्थन में भी आवाजें उठी थीं लेकिन एक दिन ऐसा आया जब उन प्रथाओं को भी देश से विदा कर दिया गया.