‘जिस समुदाय के लिए तीन तलाक विधेयक ला गया है, उसके प्रतिनिधियों से इस पर कोई बात ही नहीं की गई.’  

— असदुद्दीन ओवैसी, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख

असदुद्दीन ओवैसी ने यह बात मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण (तीन तलाक) विधेयक पर लोकसभा में बहस के दौरान कही. इस विधेयक को देश के संविधान के खिलाफ बताते हुए उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, ‘अगर हिंदू समुदाय में कोई तलाक होता है तो उसके लिए एक साल की सजा का प्रावधान है जबकि मुसलमानों के लिए तीन साल की सजा का प्रावधान किया जा रहा है. आखिर यह भेदभाव क्यों है.’ असदुद्दीन ओवैसी ने आगे कहा कि इस विधेयक के कई प्रावधान मुसलमानों के खिलाफ हैं इसलिए उनकी पार्टी किसी हाल में इसे स्वीकार नहीं कर सकती.

‘मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का संरक्षण न कर पाने के लिए कांग्रेस को माफी मांगनी चाहिए.’  

— अमित शाह, भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष

अमित शाह ने यह बात लोकसभा में तीन तलाक विधेयक पारित होने के बाद एक ट्वीट के जरिये कही. इस विधेयक को मुस्लिम महिलाओं की समानता व गरिमा सुनिश्चित कराने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए उन्होंने इस ट्वीट में आगे लिखा, ‘मुस्लिम महिलाओं के साथ दशकों तक अन्याय के लिए कांग्रेस और दूसरे दलों को माफी मांगनी चाहिए.’ इसके साथ ही इस विधेयक के पारित होने पर अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सरकार को बधाई भी दी है.


‘किसी धर्म में दखल देकर सरकार का कानून बनाना सही नहीं है.’  

— मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता

मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह बात लोकसभा में तीन तलाक विधेयक पर हुई चर्चा के दौरान कही. इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा कि इस विधेयक का संबंध मुस्लिम समुदाय की करोड़ों महिलाओं के साथ है इसलिए पहले इसे ज्वाइंट सिलेक्ट कमेटी (संयुक्त चयन समिति) के पास भेजा जाना चाहिए. मल्लिकार्जुन खड़गे ने आगे कहा कि इस समिति की रिपोर्ट आने के बाद इस विधेयक को पारित कराने पर विचार होना चाहिए.


‘कुछ कठमुल्लाओं को खुश करने के लिए कांग्रेस ने पहले भी तीन तलाक विधेयक को कानून नहीं बनने दिया था.’

— मुख्तार अब्बास नकवी, केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री

मुख्तार अब्बास नकवी ने यह बात तीन तलाक विधेयक को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कही है. उन्होंने यह भी कहा कि जब सती प्रथा और बाल विवाह को खत्म कराने की बात उठी तो उस दौरान भी उन प्रथाओं का कई लोगों ने समर्थन किया था लेकिन एक दिन ऐसा आया जब उन प्रथाओं को देश से विदा होना पड़ा. नकवी के मुताबिक, ‘जो लोग देश में फतवों की दुकान खोले बैठे हैं उसे बंद होना चाहिए क्योंकि देश कानून से चलता है फतवों से नहीं.’


‘तीन तलाक विधेयक को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए.’  

— रविशंकर प्रसाद, केंद्रीय कानून मंत्री

रविशंकर प्रसाद ने यह बात लोकसभा में तीन तलाक विधेयक प्रस्तुत करते हुए कही. उन्होंने यह भी कहा, ‘20 इस्लामिक देश इस प्रथा को खत्म कर चुके हैं. यही नहीं हमारा पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान भी इस कुप्रथा को अपने यहां से खत्म कर चुका है. ऐसे में एक धर्मनिरपेक्ष देश होने के नाते भारत को भी इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए.’ रविशंकर प्रसाद ने आगे कहा, ‘यह विधेयक महिलाओं को न्याय दिलाने और उन्हें सशक्त करने के लिए लाया गया है.’