राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के धनौरा मंडी थाने में हिरासत के दौरान एक दलित युवत की मौत के मामले में राज्य सरकार को नोटिस भेजा है. बुधवार को युवक की मौत होने के बाद आज आयोग ने स्वयं संज्ञान लेते हुए यह कदम उठाया है. पीटीआई के मुताबिक नोटिस में आयोग ने स्पष्टीकरण मांगा कि पुलिस हिरासत में हुई उक्त मौत के बारे में आयोग को सूचित क्यों नहीं किया गया. इसके अलावा उसने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को चार हफ्ते के अंदर विस्तृत रिपोर्ट देने को भी कहा है.

नोटिस में आयोग ने यह भी कहा कि सरकार की रिपोर्ट में यह भी बताया जाना चाहिए कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति कानून व नियमों के तहत मृतक के परिजनों को कोई आर्थिक या अन्य राहत प्रदान की गई या नहीं. उधर, अमरोहा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि मामले में एक इंस्पेक्टर और एक सब-इंस्पेक्टर सहित छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. उनके मुताबिक इन सभी को अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार रोकथाम) कानून के तहत आरोपित बनाया गया है.

गौरतलब है कि बीती 23 दिसंबर को पुलिस ने चोरी के एक प्रकरण में पीड़ित दलित युवक को गिरफ्तार किया था. उसके परिजन का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसे छोड़ने के लिए पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी, जो वे नहीं दे सके. उनके मुताबिक उसके बाद युवक को बर्बर यातना दी गई जिससे उसकी मौत हो गई. इस घटना को लेकर इलाके में तनाव का माहौल है. मामला सामने आने के बाद मृतक के गांव के लोगों ने कई वाहन क्षतिग्रस्त कर दिए, जिसके बाद मौके पर पीएसी तैनात कर दी गई. उधर, पीड़ित की पत्नी ने सरकार से अपने पति की हत्या का हर्जाना मांगा है और खुद के लिए नौकरी की मांग की है.