शिवराज जी, क्या मध्य प्रदेश में सत्ता गंवाने के बाद अब आप केन्द्रीय राजनीति में कदम रखेंगे?

अभी तो केन्द्र को ही नहीं पता कि वह अगले साल केन्द्रीय राजनीति के लिए बचेगा भी या नहीं. वैसे भी केन्द्र में जाकर जोशी या आडवाणी की तरह कोल्ड स्टोरेज का हिस्सा बनने से बेहतर है कि मैं मध्य प्रदेश का टाइगर बनकर ही जिंदा रहूं!

टाइगर से याद आया, हाल ही आपने अपने लिए कहा था - टाइगर अभी जिंदा है.आप पहले भी ऐसे फिल्मी डायलॉग बयानों में शामिल करते रहे हैं. ऐसा करने की कोई खास वजह?

देखिए ऐसा है कि अभिनय में तो हम नेता अभिनेताओं को मात देते हैं, पर डायलॉग डिलेवरी में वे हमें पीछे छोड़ देते हैं. अब मुख्यमंत्री की कुर्सी छूटने के बाद जनता के सामने अभिनय करने का तो ज्यादा स्कोप बचा नहीं...सो मैंने सोचा कि डायलॉग डिलेवरी से ही लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच लूं.

शिवराज जी, आपको इन विधानसभा चुनावों में भाजपा के कैसे प्रदर्शन की उम्मीद थी?

वैसे ही जैसे 2019 के आम चुनाव में भाजपा को पूरे देश में प्रदर्शन की उम्मीद है.

अच्छा यह बताइए, अगले आम चुनाव में आपको भाजपा से कैसे प्रदर्शन की उम्मीद है?

प्रदर्शन की उम्मीद तो तब बताई जाए जब ये तय हो की कौन-कौन से कार्ड खेले जाएंगे और किन खिलाड़ियों को मैदान में उतारा जाएगा...यहां तो अभी तक कार्ड और खिलाड़ी दोनों को लेकर ही गफलत है! वैसे मैं बस इतना ही कहूंगा ‘हार और जीत ऊपर वाले के हाथ है जहांपनाह! हम सब तो रंगमंच की कठपुतलियां हैं, कब, कौन, कहां कैसे उठेगा ये कोई नहीं जानता’! (मुस्कुराते हुए)

क्या आपको लगता है कि 2019 में देश में फिर से मोदी लहरआएगी?

ऐसा है कि हमारे देश में साल-दर-साल बाढ़ वापस आती है लहर नहीं!...मेरे कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि उस लहर में बहे हुए लोग किनारे लग चुके हैं, अब वे जानते हैं कि फिर से उसी लहर में बहने से खुद को कैसे बचाना है.

अच्छा यह बताइए कि आपके अमित शाह की जगह पर भाजपा अध्यक्ष बनने की कितनी संभावना है?

देखिए, राजनीति में संभावना कब दुर्भावना और फिर दुर्घटना में बदल जाए कुछ कहा नहीं जा सकता. हमारे यहां जाटों के बारे में एक कहावत प्रसिद्ध है - ‘जाट मरा तब जानिए, जब तेरहीं हो जाए.’ यह बात जाटों के बारे में कहां तक लागू होती है, यह तो मैं नहीं कह सकता, लेकिन राजनीति में यह पूरी तरह सटीक बैठती है. कुल मिलाकर मैं भला अभी से कैसे कह सकता हूं कि किसकी तेरहवीं...अर्र ...मेरा मतलब कि ताजपोशी कब और कहां होनी है.

शिवराज जी, क्या आप योगी अदित्यनाथ को मोदी जी के विकल्प के तौर पर देखते हैं?

देखिए, योगी जी अब तक अपने योग के बल पर सिर्फ हनुमान जी की जाति ही पता लगा सके हैं, पर बात तो तब होती न, जब वे योगबल से चुनाव परिणाम भी बदल देते! रही बात मोदी जी के विकल्प के तौर पर योगी जी को दखने की, तो मेरा कहना है कि मोदी जी पूरे देश में भाजपा की लहर ले आए थे, पर योगी जी तो पांच राज्यों में से एक में भी भाजपा की सरकार नहीं ला सके. सीधे-सीधे कहूं तो ‘ठांय-ठांय पद्धति’ से सफल एनकांउटर सिर्फ उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में ही संभव हैं, पूरे देश में नहीं!

कमलनाथ जी ने मुख्यमंत्री बनते ही किसानों का कर्जा माफ कर दिया. आखिर आपने इतने सालों में किसानों को क्या दिया?

हमने किसानों को लाठीचार्ज दिया, गोलियां दी, मृतकों को मुआवजा दिया...मामा ने उन्हें जो-जो दिया, क्या वह कभी कमलनाथ जी दे सकेंगे?...अब्ब्ब मेरा मतलब कि कर्जा माफी भी हम ही दे देते तो कमलनाथ जी फिर भला क्या देते. वैसे भी ये कर्जमाफी छलावा है.

यह बताइए कि अलग-अलग राज्यों में किसानों के लिए कर्जमाफी की घोषणाओं के बाद भी उनकी मुश्किलें कम क्यों नहीं हो रही हैं?

आप साधारण सवाल पूछिए यक्ष प्रश्न नहीं, मैं युधिष्ठिर नहीं शकुनि...अब्ब्ब मतलब की मामा हूं!

शिवराज जी, क्या आपको लगता है कि अगला लोकसभा चुनाव भाजपा हिंदू कार्ड के भरोसे जीत सकती है?

जो कार्ड पांच राज्यों में इनवैलिड हो गया वह पूरे देश में क्या चलेगा! मेरे कहने का मतलब बस ये है कि लोकसभा चुनाव किसी एक-दो कार्ड या लहर के भरोसे नहीं जीता जा सकता...हमें बहुत सारे कार्ड खेलने होंगे!

आपने विपक्ष की भूमिका में आकर कहा कि अब आप चौकीदारी करेंगे. जबकि नरेन्द्र मोदी बतौर प्रधानमंत्री खुद को देश का चौकीदारकहते हैं. तो आपके हिसाब से अच्छी चौकीदारी सत्ता में रहकर हो सकती है या विपक्ष में रहकर?

देखिए चौकीदार कई प्रकार के होते हैं और चौकीदारी बहुत तरह से होती है. जैसे कुछ लोग वर्दी पहनकर चौकीदारी करते हैं और कुछ बिना वर्दी पहने. कुछ गेट पर खड़े होकर चौकीदारी करते हैं और कुछ घर के भीतर से. इसी तरह कुछ लोग चोरों की चौकीदारी करते हैं, तो कुछ लोग चोरी करना कब सही रहेगा इस बात की चौकीदारी करते हैं! कुल मिलाकर सभी तरह की चौकीदारी काफी जोखिम और जिम्मेदारी से भरी है. और रही बात ये कि चौकीदारी कहां से अच्छी हो सकती है...तो मैं इतना ही कहूंगा कि सत्ता में रहकर आप काफी व्यस्त हो जाते हैं और चौकीदारी का ज्यादा समय नहीं मिल पाता, सो ऐसे में विपक्ष में रहकर ही चौकीदारी अच्छी है.

हाल ही में मुख्यमंत्री कमलनाथ जी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के कारण मध्य प्रदेश के लोगों का रोजगार छिन रहा है. इस बारे में आप क्या कहेंगे?

इस बारे में मैं ज्योतिरादित्य सिंधिया जी की बात से पूरी तरह सहमत हूं. मैं और सिंधिया जी तो उत्तर प्रदेश वालों की इस मनमानी के सबसे पहले भुक्तभोगी हैं! आखिर हमसे मुख्यमंत्री की कुर्सी एक यूपी वाले ने ही छीनी है. ऐसा बयान देने से पहले कमलनाथ जी को अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए जो व्यक्ति खुद मध्य प्रदेश वालों के पद छीनने में सबसे आगे है, वह भला उनके रोजगार छीनने वालों पर क्या ही कार्रवाई करेगा!