भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि फंसे हुए ऋण (एनपीए) के मामलों में सुधार हुआ है और मार्च में वित्तीय परिणामों के दौरान इनमें और कमी आ सकती है. हालांकि आरबीआई गवर्नर ने यह भी कहा कि इस सुधार के बावजूद एनपीए अभी भी काफी ज्यादा बना हुआ है.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक आरबीआई ने सोमवार को जारी अपनी छमाही वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) में कहा है कि सितंबर 2018 तक बैंकों के कुल एनपीए के अनुपात में 10.8 प्रतिशत की गिरावट आई, जो मार्च 2018 में 11.5 प्रतिशत तक चला गया था. रिपोर्ट में बैंक ने कहा कि मार्च 2019 तक एनपीए अनुपात घट कर 10.3 प्रतिशत रह सकता है.

वहीं, कर्ज देने वाले बैंकों की बात करें तो इनमें सरकारी बैंकों का कुल एनपीए मार्च 2019 तक घट कर 14.6 प्रतिशत रह सकता है जो सितंबर 2018 में 14.8 प्रतिशत था. वहीं, निजी बैंकों का अनुपात 3.8 प्रतिशत से घटकर 3.3 प्रतिशत हो सकता है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बड़े कर्जदार एनपीए की समस्या के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं. रिपोर्ट के मुताबिक बैंकों के कुल ऋण का 54.6 प्रतिशत इन्हीं बड़े कर्जदारों को दिया गया, जबकि कुल एनपीए का 83.4 प्रतिशत हिस्सा नहीं चुकाने के लिए है यही बड़े कर्जदार जिम्मेदार हैं.