पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी व वकील प्रशांत भूषण रफाल विमान सौदे के मामले में फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं. उन्होंने आज सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अपील की कि वह रफाल मामले में 14 दिसंबर को दिए अपने फैसले की समीक्षा करे. इस फैसले में कोर्ट ने रफाल सौदे को लेकर सरकार को एक तरह से क्लीन चिट दे दी थी. उसने कहा था कि सौदे की प्रक्रिया को लेकर किए गए फैसलों पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है.

सर्वोच्च अदालत के इस फैसले पर तीनों याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कोर्ट का फैसला सरकार द्वारा सीलबंद लिफाफे में दिए हलफनामे पर आधारित था. उनका कहना है कि हलफनामे में सरकार ने कई गलत दावे किए हैं. इस आधार पर तीनों ने अपील की है कि सुप्रीम कोर्ट उनकी पुनर्विचार याचिका पर एक खुली अदालत में मौखिक सुनवाई करे.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने रफाल सौदे में कथित गड़बड़ियों की जांच करने की मांग करने वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दी थीं. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने एकमत से यह फैसला सुनाया था. कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई सबूत पेश करने में नाकाम रहे जिससे साबित हो सके कि सौदे में किसी तरह का पक्षपात हुआ है. शीर्ष अदालत का यह भी कहना था कि वह सरकार की बुद्धिमत्ता पर फैसला नहीं दे सकती.