रफाल मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के बीच बुधवार को लोक सभा में बहस को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. बुधवार को रफाल मुद्दे पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने एक बार फिर इस लड़ाकू विमान से जुड़े सौदे पर कई सवाल उठाए. इनमें अनिल अंबानी की कंपनी को ऑफसेट पार्टनर बनाना और विमान की कीमत के साथ कई अन्य मुद्दे शामिल थे. वहीं, अरुण जेटली ने इस मुद्दे पर कांग्रेस पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया. साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देकर रफाल सौदे की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच की विपक्ष की मांग से इनकार कर दिया.

लिव-इन पार्टनर के साथ शारीरिक संबंध बलात्कार नहीं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में साफ किया है कि लिव-इन पार्टनर के साथ शारीरिक संबंध बलात्कार नहीं है. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक शीर्ष अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा, ‘बलात्कार और सहमति से संबध के बीच साफ अंतर है. यदि पुरुष के लिए परिस्थितियां नियंत्रण से बाहर हो गई हों और इनके चलते वह अपनी लिव-इन पार्टनर से शादी नहीं कर पाया हो तो दोनों के बीच शारीरिक संबंध बलात्कार नहीं है. हालांकि, शीर्ष न्यायालय ने साफ किया कि अदालतों को ऐसे मामले में बहुत सावधानी से जांच करनी चाहिए कि क्या आरोपित सही में पीड़िता से शादी करना चाहता था या फिर गलत मकसद से उसने इसका झूठा वादा किया.

सीबीआई ने सेना के एक कर्नल सहित पांच अन्य सैन्यकर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भारतीय सेना के एक कर्नल सहित पांच सैन्यकर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है. हिन्दुस्तान में छपी खबर के मुताबिक इन सभी पर अरुणाचल प्रदेश और असम में तैनात जवानों के लिए राशन आपूर्ति करने वाले से 18 लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप है. यह मामला 2015 और 2017 के बीच का है. इस बात की जानकारी सामने आने के बाद सेना ने ही आरोपितों के खिलाफ शिकायत की थी. बताया जाता है कि हालिया दिनों में सैन्य अधिकारियों के खिलाफ आपूर्ति संबंधी भ्रष्टाचार की यह दूसरी घटना है, जिसमें सीबीआई ने भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत मामला दर्ज किया है.

इराक : कुर्द इलाके में खतने के खिलाफ महिलाओं का आंदोलन

आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट का दंश झेल चुके इराक के कुर्द गांवों में अब महिलाओं ने खतने के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की है. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक इन महिलाओं ने एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) से जुड़कर खतने के खिलाफ अभियान को सफल बनाने की शपथ ली है. बताया जाता है कि यह कोशिश कुर्द क्षेत्र में रंग ला रही है. यूनिसेफ ने इसकी पुष्टि की है कि पूरे इराक के मुकाबले इस क्षेत्र में बच्चियों के खतने की संख्या में कमी आई है. कुर्द प्राधिकार ने साल 2011 में खतने को घरेलू हिंसा कानून के तहत अपराध करार दिया था.