केरल का सबरीमला मंदिर गुरुवार को शुद्धिकरण के बाद खोला गया. ऐसा इसलिए क्योंकि बुधवार तड़के यहां 50 साल से कम उम्र की दो महिलाओं ने प्रवेश कर भगवान अयप्पा के दर्शन किए थे. जबकि मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर परंपरा के अनुसार पाबंदी है क्योंकि इस आयु काल में महिलाएं मासिक धर्म से गुजर रही होती हैं.

ख़बरों के मुताबिक शुद्धिकरण की प्रक्रिया लगभग डेढ़ घंटे चली. इस दौरान मंदिर में सभी भक्तों के लिए दर्शन बंद रहे. केरल के मंत्री ईपी जयराजन ने मंदिर के शुद्धिकरण की इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है. उन्होंने इसे ‘न्यायालय के आदेश की अवमानना’ बताया है. साथ ही कहा, ‘अस्पृश्यता भी कानून के ख़िलाफ़ ही है.’ इससे पहले राज्य के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने पुष्टि की थी कि दो महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश कर भगवान अयप्पा के दर्शन किए हैं. उन्होंने कहा था, ‘जो भी मंदिर जाना चाहे उसे सुरक्षा देना पुलिस की ज़िम्मेदारी है.’

मंदिर में प्रवेश करने वाली बिंदु और कनकदुर्गा नाम की दोनों महिलाओं ने ही बुधवार को ख़ुलासा किया था कि उन्हाेंने भगवान अयप्पा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की है. हालांकि उन्होंने यह भी बताया था कि वे मूर्ति के पास तक नहीं गईं और न परंपरागत रूप से 18 सीढ़ियां चढ़कर उन्होंने मंदिर में प्रवेश किया. बल्कि वे स्टाफ के लिए नियत दरवाज़े से भीतर गईं और विशिष्ट व्यक्तियों के लिए बने बरामदे से उन्होंने दूर से ही भगवान अयप्पा की पूजा-अर्चना की. ग़ौरतलब है कि इससे पहले ऐसी कई कोशिशें भक्तों के विरोध के कारण विफल हो गई थीं.

दरअसल यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पिछले साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने हर उम्र की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश की इजाज़त दे दी थी. इसके बाद सबरीमला और उसके आसपास अदालत के इस फ़ैसले का भारी विरोध हो रहा था. तमाम सुरक्षा बंदोबस्त और कोशिश के बाद भी किसी महिला को प्रदर्शनकारियों ने मंदिर में घुसने नहीं दिया. बिंदु और कनकदुर्गा को भी एक बार मंदिर के 500 मीटर की दूरी तक पहुंचने के बाद लौटना पड़ा था. हालांकि दूसरी बार में वे पुलिस के साथ मिलकर पूरी योजना के साथ गईं और सफल हुईं.