भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी का हवाला देकर सोशल मीडिया पर एक मैसेज कुछ दिनों से खूब शेयर किया जा रहा है. तमाम सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों पर वायरल इस मैसेज में लिखा है कि भारत में ज़्यादातर समाचार चैनलों और पत्रिकाओं के मालिक ‘विदेशी’ हैं. यहां दावा किया गया है कि सऊदी अरब, इटली, अमेरिका, ब्रिटेन और दुबई के नागरिक इन चैनलों व पत्रिकाओं के मालिक हैं और इन्हीं के इशारों पर ये मीडिया संस्थान चलते हैं.

अंग्रेज़ी भाषा में वायरल इस मैसेज में लिखा है, ‘ब्रेकिंग न्यूज़. सुब्रमण्यम स्वामी की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है.

स्वामी ने अपील में कहा है कि सभी न्यूज़ चैनल और अन्य मीडिया संस्थान भारतीय नागरिकों द्वारा चलाए जाने चाहिए.

सच यह है कि सऊदी अरब, इटली, अमेरिका, ब्रिटेन और दुबई के नागरिक इन चैनलों और पत्रिकाओं के मालिक हैं.

इसी वजह से ये मीडिया संस्थान अपने मालिकों की धुन पर नाचते हैं जिनका अपना छिपा एजेंडा है.

उनकी (सुब्रमण्यम स्वामी) अपील है कि सुप्रीम कोर्ट इस बारे में देश के हित में एक उचित फ़ैसला दे.

अगर सुप्रीम कोर्ट ऐसा करता है तो एबीपी, आजतक, एनडीटीवी और ऐसे कई चैनल बंद हो जाएंगे.

जब से यह मामला जानने में आया है, तब से ये चैनल हिल गए हैं. वे बहुत ज़्यादा चिंतित हैं.

उनकी हालत ऐसी है कि वे इसे अपने यहां ख़बर की तरह दिखा भी नहीं सके.

एक सच्चे भारतीय होने के नाते यह हमारा कर्तव्य है कि हम इस ख़बर को आगे और फैलाएं और देश के हर नागरिक तक पहुंचाएं.... वंदे मातरम्.’

वायरल मैसेज
वायरल मैसेज

यह मैसेज पढ़ने के बाद दो सवाल ज़ेहन में आते हैं. एक यह कि क्या सुब्रमण्यम स्वामी ने ऐसी कोई अपील सुप्रीम कोर्ट में दायर की है जिसमें भारतीय नागरिकों को ही मीडिया संस्थानों के मालिक बनाए जाने की बात कही गई हो, और क्या वाक़ई में भारत में ज़्यादातर न्यूज़ चैनलों के मालिक विदेशी हैं.

पहले सवाल का जवाब तो निश्चित ही ‘नहीं’ है. भाजपा सांसद ने ऐसी कोई अपील दायर नहीं की है. हालांकि, कुछ साल पहले उन्होंने एक अपील दायर कर यह मांग ज़रूर की थी कि किसी अख़बार का संपादक एक भारतीय को ही बनाया जाना चाहिए. उन्होंने ‘प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ़ बुक्स एक्ट, 1867’ में संपादक की परिभाषा तय किए जाने को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट (सुप्रीम कोर्ट नहीं) में यह अपील दायर की थी. लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका यह कहकर ख़ारिज कर दी थी कि यह तय करना अदालत का काम नहीं है. अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू की इस रिपोर्ट में आप यह ख़बर पढ़ सकते हैं.

अब आते हैं उस दावे पर जिसके मुताबिक़ देश में चल रहे ज़्यादातर न्यूज़ चैनलों के मालिक विदेशी हैं. भारत में इस समय सैकड़ों छोटे-बड़े स्थानीय व राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल चल रहे हैं. इन सभी का मालिक कौन है, यह एक पोस्ट में बताना संभव नहीं है. लेकिन इस मैसेज में दी गई जानकारी कितनी झूठी है, यह बताने के लिए एबीपी, आजतक, एनडीटीवी के ही मालिकों के बारे में बता देते हैं, क्योंकि इसमें इन्हीं चैनलों का ज़िक्र किया गया है.

आजतक चैनल इंडिया टुडे ग्रुप के तहत आता है. इसके प्रमुख संपादक अरुण पुरी का जन्म 1944 में पंजाब प्रांत के तहत लाहौर शहर में हुआ था. अब यह पाकिस्तान का एक प्रमुख शहर है, लेकिन उस समय यह भारत का ही हिस्सा था. इंडिया टुडे ग्रुप को आदित्य बिड़ला समूह चलाता है और इसके चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला हैं जिनका जन्म मुंबई में हुआ.

एबीपी न्यूज़ चैनल आनंद बाज़ार पत्रिका समूह का ही हिस्सा है. अवीक सरकार इस समूह के मालिक हैं. उनका जन्म पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में हुआ. यहीं, एबीपी समूह का मुख्यालय भी है. वहीं, एनडीटीवी समूह के मालिक प्रणय रॉय हैं. उन्होंने 1988 में अपनी पत्नी राधिका रॉय के साथ मिलकर इस मीडिया कंपनी की शुरुआत की थी. प्रणय रॉय का जन्म भी कोलकाता में हुआ. साफ़ है कि इन चैनलों और इनके मालिकों को लेकर जो जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल है, वह झूठी है.

(अगर आपके पास सोशल मीडिया के ज़रिए ऐसी कोई जानकारी (ख़बर, तस्वीर या वीडियो) आई है, जिसके सही होने पर आपको संदेह हो तो उसे हमें dushyant@satyagrah.com पर भेज दें. हम उसकी जांच कर सच सामने लाने का प्रयास करेंगे.)