शिव सेना के नेता संजय राउत ने एक बार फिर अपने ही सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा है. एनडीटीवी के साथ विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) किसी एक पार्टी की जागीर नहीं है. संजय राउत के मुताबिक, ‘एनडीए का गठन बाला साहब ठाकरे, अटल बिहारी वाजपेयी और प्रमोद महाजन जैसे नेताओं ने किया था. आज भाजपा के जो नेता एनडीए में शीर्ष पर हैं वे इसके गठन में शामिल नहीं थे. एनडीए कांग्रेस के विरोध में तैयार किया गया मोर्चा था जिसमें शिव सेना भी लंबे समय से शामिल रही है.’

रफाल सौदे पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि खुद शिव सेना ने भी इस पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि सरकार किसी एक पार्टी की नहीं होती बल्कि यह पूरे देश और जनता की होती है. संजय राउत के मुताबिक, ‘हमारी पार्टी ने इसकी जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के गठन की मांग की है. हम समझते हैं कि अगर सरकार ने कोई गलती नहीं की है तो उसे जेपीसी की मांग मान लेनी चाहिए.’ उन्होंने आगे कहा, ‘रफाल के अलावा अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर रक्षा सौदे का मामला भी चल रहा है. इन दोनों सौदों की जांच एक ही जेपीसी से करा सकते हैं.’

इसके अलावा बीते दिनों एक जनसभा के दौरान शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चोर कहे जाने का संजय राउत ने बचाव किया. उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे ने यह बात विपक्षी दलों के नेताओं के बयानों के संदर्भ में कही थी.

इस बातचीत के दौरान संजय राउत ने प्रधानमंत्री के उस बयान पर भी ऐतराज जताया जिसमें कहा गया था कि राम मंदिर निर्माण पर कोई अध्यादेश नहीं लाया जाएगा. साथ ही इस बारे में कोई विचार सुप्रीम कोर्ट से इस मामले पर फैसला आने के बाद ही किया जाएगा. राउत के मुताबिक भाजपा ने कई दशकों से राम मंदिर के नाम पर वोट मांगे हैं. साल 2014 में इसी मुद्दे पर जनता ने नरेंद्र मोदी को अपार समर्थन दिया था. उन्होंने कहा, ‘अगर अदालत के फैसले का ही इंतजार करना था तो पहले केस क्यों नहीं दाखिल किया गया. मस्जिद क्यों तोड़ी गई? मुझे लगता है 2019 के बाद राम मंदिर-बाबरी मस्जिद के नाम पर वोट मांगना बंद होना चाहिए.’