वैज्ञानिक शोध के विश्लेषण से संबंधित एक अंतरराष्ट्रीय संगठन ने दुनिया के 4,000 सबसे योग्य वैज्ञानिकों की सूची जारी की है. इसमें भारत के भी दस वैज्ञानिक शामिल हैं. क्लेरिवेट एनालिटिक्स नामक इस संगठन की पिछले साल की सूची में पांच भारतीय वैज्ञानिकों को शामिल किया गया था. इस साल यह संख्या दोगुनी हो गई है.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक इस सूची में भारत के सीएनआर राव का नाम शामिल है. वे जाने-माने वैज्ञानिक होने के अलावा देश के प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहाकर परिषद के पूर्व सदस्य भी रहे हैं और भारत रत्न से नवाजे जा चुके हैं. उनके अलावा आईआईटी-कानपुर के अविनाश अग्रवाल, आईआईटी-मद्रास के रजनीश कुमार और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर दिनेश मोहन को सूची में जगह दी गई है. वहीं, एनआईटी-भोपाल से भी दो वैज्ञानिकों अजय मित्तल और ज्योति मित्तल को शामिल किया गया है. ये दोनों पति-पत्नी हैं.

सूची में जगह बनाने वालों में कुछ अन्य भारतीय संस्थानों के वैज्ञानिक भी शामिल हैं. इनमें भुवनेश्वर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज के संजीव साहू, हैदराबाद के इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर सेमी-एसिड ट्रॉपिक्स के राजीव वार्शने और कोयंबटूर की भारतीयर यूनिवर्सिटी के शक्तिवेल रतिनास्वामी को सूची में जगह दी गई है.

हालांकि इस मामले में चीन हमसे काफी आगे निकल गया है. वह 482 वैज्ञानिकों की संख्या के साथ इस सूची में तीसरे नंबर पर है. उससे आगे केवल अमेरिका और ब्रिटेन हैं जो क्रमशः 2,639 और 546 वैज्ञानिकों के साथ पहले और दूसरे नंबर पर हैं. सूची में शामिल भारतीय वैज्ञानिकों ने इस पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि भारत में अकादेमिक ढांचा ऐसा है कि यहां विज्ञान के क्षेत्र में ज्यादा शोध नहीं हो पाता. आईआईटी-कानपुर के अविनाश अग्रवाल का यह भी कहना है कि भारत जैसे देश में वैज्ञानिकों को उचित सम्मान नहीं मिलता.