प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को असम और मणिपुर के दौरे पर पहुंचे. स्क्रॉल डॉट इन के मुताबिक इस दौरान असम के सिलचर में उन्होंने कहा, ‘नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (एनआरसी) से किसी भारतीय को बाहर नहीं रहने दिया जाएगा. मैं जानता हूं कि इसकी वजह से आप लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है. लेकिन कई दशकों से अटका यह कार्यक्रम अब अपने अंतिम दौर में है.’

एनआरसी का उद्देश्य असम में भारत के वास्तविक नागरिकों और वहां गैर-कानूनी ढंग से रह रहे लोगों की पहचान करना है. नियमों के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति 25 मार्च 1971 की आधी रात के पहले अपने संबंधियों के असम में होने की बात साबित नहीं कर पाता है तो उसे विदेशी घोषित किया जाएगा. हालांकि एनआरसी के साथ कई विवाद भी जुड़ चुके हैं. साथ ही इसे एक समुदाय विशेष के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई भी कहा गया है.

उधर, शुक्रवार को ही प्रधानमंत्री ने मणिपुर में चार परियोजनाओं की आधारशिला रखी और आठ विकास परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया. इन परियोजनाओं में मोरेह की एकीकृत जांच चौकी, कांगपोकपी जिले के थंगापट में ईको टूरिज्म कॉम्प्लेक्स, नोनी जिले में एकीकृत पर्यटन स्थल, लांबुई में नवोदय विद्यालय, दौलाईथाबी में बैराज, चुराचांदपुर क्षेत्र में उन्नत जल आपूर्ति व्यवस्था के अलावा एक खाद्य भंडारण और एक जलाशय शामिल हैं.

इस मौके पर नरेंद्र मोदी ने कहा कि बीते कुछ समय में उन्होंने मणिपुर में 15 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू करवाई हैं. इसके साथ ही पूर्व की केंद्र व राज्य सरकारों पर निशाना साधते हुए उन्होंने राज्य की अनदेखी का आरोप भी लगाया. मोदी ने कहा है, ‘राज्य में पिछली सरकार की अनेदखी से 19-20 करोड़ रुपये में बनने वाली विकास परियोजनाओं की लागत 500 करोड़ रुपये पर पहुंच गई. लेकिन हमारी सरकार ने इस प्रकृति को बदल दिया है.’