केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार तीन महीने बाद होने वाले लोक सभा चुनाव के मद्देनज़र जल्द ही किसानों की परेशानी दूर करने के लिए किसी योजना की घोषणा कर सकती है. यह घोषणा एक फरवरी को पेश होने वाले बजट में या उसके थोड़ा आगे-पीछे हो सकती है. या 26 जनवरी को भी ऐलान किया जा सकता है. सूत्राें की मानें तो मोदी सरकार इस बाबत कई फॉर्मूलों पर विचार कर रही है. इनमें ओडिशा और तेलंगाना में लागू किए गए फॉर्मूले भी हैं.

द इकॉनॉमिक टाइम्स के अनुसार तेलंगाना में राज्य सरकार छोटे किसानों को रबी और ख़रीफ़ के सीज़न में चार-चार हजार रुपए वित्तीय मदद दे रही है. यह मदद बीज और खाद ख़रीदने के लिए दी जाती है. यह योजना सफलतापूर्वक वहां लागू हो चुकी है. वहीं ओडिशा सरकार ने सभी तरह के किसानों (भू-मालिक और भूमिहीन) को सालाना 10,000 रुपए मदद देने का ऐलान किया है. यह पैसा भी खाद-बीज की ख़रीद के लिए ही दिए जाने की तैयारी है. हालांकि इसे लागू करने में राज्य सरकार के सामने कुछ चुनौतियां आ रही हैं.

सूत्रों की मानें तो मोदी सरकार ओडिशा मॉडल अपनाने के बारे में ज़्यादा गंभीरता से विचार कर रही है. इसकी दो-तीन वज़हें हैं. पहली- इसमें लाभार्थी किसानों की पहचान में ज़्यादा वक़्त नहीं लगेगा. यानी अप्रैल में होने वाले लोक सभा चुनाव से पहले ही किसान परिवारों तक वित्तीय मदद पहुंचने लगेगी. जबकि तेलंगाना मॉडल अपनाने पर किसानों की पहचान करने में एक साल तक का वक़्त लग सकता है. ओडिशा की योजना अपनाने पर दूसरा लाभ ये है कि किसान परिवारों के पास तुलनात्मक रूप से ज़्यादा राशि पहुंचेगी.

इसके अलावा सरकार पर वित्तीय बोझ भी कम (लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपए) आएगा, बावज़ूद इसके कि किसानों को ज़्यादा पैसा देना होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि मोदी सरकार भूमिहीन किसानों को इस वित्तीय सहायता योजना से बाहर रखने का मन बना रही है क्याेंकि वे सीधे तौर पर खेती-किसानी के मक़सद से लिए गए कर्ज़ के बोझ से दबे नहीं होते. हालांकि सूत्र यह भी जोड़ते हैं मोदी सरकार की योजना में अन्य राज्यों में लागू इसी तरह दूसरी योजनाओं के अंश भी समाहित हो सकते हैं. यानी यह कम्प्लीट पैकेज हो सकता है.