पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल पर केंद्रित फिल्म ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ के डायरेक्टर विजय रत्नाकर गुट्‌टे कर चोरी के आरोपित हैं. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उन पर इस तरह के आरोप भारत में ही नहीं ब्रिटेन में भी लगे हैं. उनके ख़िलाफ़ दर्ज़ चल रहे अदालती मामलों के मार्फ़त यह जानकारी सामने आई है.

अख़बार के मुताबिक विजय रत्नाकर गुट्‌टे वीआरजी डिजिटल कॉरपोरेशन के नाम से कंपनी चलाते हैं. इसी कंपनी ने ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ फिल्म बनाई है. गुट्‌टे उसके डायरेक्टर भी हैं. ख़बर की मानें तो गुट्‌टे को लगभग 34 करोड़ रुपए की जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) धोखाधड़ी के मामले में पिछले साल ग़िरफ़्तार किया गया था. वे जुलाई 2017 से फ़र्ज़ी बिलों के जरिए धोखाधड़ी कर रहे थे. लिहाज़ा उनसे और पूछताछ की गरज से उनकी रिमांड लेने के लिए जीएसटी ख़ुफ़िया इकाई (डीजी जीएसटीआई) ने अदालत में याचिका लगाई.

इसी याचिका में डीजी जीएसटीआई ने गुट्‌टे के ख़िलाफ ब्रिटेन में कर धोखाधड़ी का मामला दर्ज़ होने की जानकारी दी है. इसमें बताया है कि उन्होंने ब्रिटेन में अपनी फिल्म को करों से राहत दिलाने के लिए घरेलू फर्मों से मिलकर ब्रिटिश फिल्म इंस्टीट्यूट (बीएफआई) के साथ धोखाधड़ी की. उन्होंने फ़र्ज़ी दस्तावेज़ के जरिए यह साबित किया कि फिल्म से सबसे ज़्यादा पैसा बीसीटीएमपीएल (बॉम्बे कास्टिंग टेलेंट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड) ने लगया है. यह कंपनी बोहरा ब्रदर्स की है जो ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ के निर्माताओं में से एक हैं.

बीसीटीएमपीएल चूंकि ब्रिटेन के कराधान दायरे में भी आती है. इसीलिए ब्रिटिश नियमों के मुताबिक उसकी बनाई फिल्म को ब्रिटेन में कर से राहत दी जा सकती है. बशर्ते फिल्म बनाने पर किए गए कुल ख़र्चे का 10 फ़ीसदी हिस्सा ब्रिटेन में भी ख़र्च किया गया हो. इन शर्तों को पूरा करने पर ब्रिटिश सरकार संबंधित फिल्म को कर 25 फ़ीसदी तक की राहत देती है. बताया जाता है कि गुट्‌टे ने सही मायने में पात्र न होने के बावज़ूद अपनी फिल्म के लिए यह राहत का दावा किया है. हालांकि गुट्‌टे किसी भी तरह के फ़र्ज़ीबाडे की बात से इंकार करते हैं.