असम की भारतीय जनता पार्टी सरकार में मंत्री और पूर्वोत्तर में पार्टी का चेहरा कहे जाने वाले हिमंत बिस्वा सरमा ने नागरिकता कानून के मसले पर विवादित बयान दिया है. उन्होंने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा, अगर ‘नागरिकता संशोधन विधेयक (2016) पारित नहीं हुआ तो असम जिन्ना (पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना) के रास्ते पर चला जाएगा. यहां की 17 सीटें (लोक सभा की) उसी धारा में बह जाएंगीं. हम उसी स्थिति से असम को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. इसका हमें कोई अफ़सोस नहीं है.’

सरमा ने कहा, ‘लोग चिंता जता रहे हैं कि हम किसी को बाहर से (असम में) लाने वाले हैं. यह पूरी तरह ग़लत है. इस कानून बिना हम जिन्ना की विचारधारा के सामने घुटने टेक रहे होंगे. यह संघर्ष जिन्ना की छोड़ी गई विरासत (विभाजन की) और भारतीय विचारधारा के बीच है.’ हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ‘जिन्ना’ से उनका ताल्लुक़ किसी समुदाय विशेष से नहीं है.

उल्लेख करना होगा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार नागरिकता संशोधन विधेयक-2016 संसद में लाने की तैयारी में है. इसमें बांग्लादेश, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान से आने वाले ग़ैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दिए जाने का प्रावधान है. इस विधेयक को 1985 के असम समझौते का उल्लंघन माना जा रहा है जिसमें 24 मार्च 1971 के बाद दूसरे देश से भारतीय सीमा में आए सभी शरणार्थियों को ‘विदेशी’ नागरिक मानने का प्रावधान है. इसी कारण नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध हो रहा है.

हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ख़ुद सिलचर में हुए एक कार्यक्रम के दौरान कह चुके हैं कि यह (संशोधन विधेयक) ‘पूर्व में की गई ग़लतियों में सुधार की कोशिश’ है. इसी लाइन पर आगे बढ़ते हुए सरमा ने यहां तक कहा कि असम समझौते का उल्लंघन होता है तो हो जाए. लेकिन हमें जिन्ना (की विचारधारा) के रास्ते पर नहीं जाना है. आपको असम समझौते और जिन्ना के बीच फ़र्क़ करना होगा. उसमें किसी एक को चुनना होगा. यह तय करना होगा कि आप किस रास्ते पर आगे जाना चाहते हैं? मैं जिन्ना के ख़िलाफ़ हूं.’