मार्च 2017 में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद से प्रदेश में हो रहीं पुलिस मुठभेड़ों पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं. यहां तक कि अब सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में हाल के समय में हुई पुलिस मुठभेड़ों को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार को नोटिस जारी किया है. यह नोटिस एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया गया. इस याचिका में मांग की गई है कि इन मुठभेड़ों की सीबीआई या एसआईटी से जांच कराई जाए और इसकी निगरानी कोर्ट करे. याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि यह एक बहुत गंभीर मामला है जिस पर विस्तृत सुनवाई की जरूरत है. मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी.

उत्तर प्रदेश पुलिस के ही एक आंकड़े के मुताबिक, 2018 तक प्रदेश में 1,038 मुठभेड़ें हुईं जिनमें 32 अपराधी मारे गए. सुप्रीम कोर्ट से पहले राज्य मानवधिकार आयोग ने भी इसी मामले पर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुछ दिन पहले दावा किया था कि उनकी सरकार ने संगठित अपराधों पर एक हद तक काबू पा लिया है. उनका कहना था, ‘हमने कानून के राज को मजबूत बनाया है. पारिवारिक दुश्मनी या निजी झगड़ों के कुछ मामलों की छोड़ दें तो पूरे प्रदेश में लोग अब सुरक्षित हैं.’ योगी आदित्यनाथ ने आगे यह भी कहा कि उनके करीब दो साल के शासन में कोई दंगा नहीं हुआ है.’

मुख्यमंत्री का यह दावा जिस समय मीडिया की सुर्खियां बटोर रहा था, ठीक उसी समय ‘अतीक की दबंगई से डरा बरेली जिला जेल प्रशासन’ और ‘अतीक ने देवरिया जेल में आठ और की उधेड़ी थी चमड़ी’ जैसी खबरें मुख्यमंत्री के दावे की सच्चाई बता रही थीं. ये खबरें बता रही थीं कि देवरिया जेल में बंद कुख्यात माफिया अतीक अहमद जेल में ही बुलाकर लोगों को ब्लैकमेल कर रहा है और विरोध करने पर उनके साथ वहीं मारपीट कर रहा है.

उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार के पतन की सबसे बड़ी वजह कानून व्यवस्था का मुद्दा थी. योगी आदित्यनाथ सरकार ने पहले दिन ही इस बात का भरोसा दिलाया था कि वह उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित करेगी. मुख्यमंत्री ने अपने पहले संबोधन में साफ कहा था कि उत्तर प्रदेश में अब अपराधियों के लिए एक ही जगह बची है और वह है जेल. उनका कहना था, ‘जो जेल में नहीं होंगे वे या तो उत्तर प्रदेश से बाहर होंगे या पुलिस की गोली का शिकार.’

इस घोषणा पर अमल भी हुआ. कई जगहों पर पुलिस मुठभेड़ों में तरह-तरह के अपराधी पुलिस की गोलियों से घायल हुए. कुछ को जान भी गंवानी पड़ी. लेकिन इससे हालात कुछ बेहतर हुए हों, ऐसा नहीं लगता. बलात्कार, पुलिस हिरासत में मौत, पुलिस पर हमले और योजनाबद्ध अपराधों पर भले ही रोक न लगी हो, लेकिन योगी का फिल्मी डाॅयलाग ‘अगर अपराध करेंगे तो ठोक दिए जायेंगे’ चर्चा पाते पाते ‘ठोक दो’ में बदल गया. मुख्यमंत्री के इस ‘ठोक दो’ में इतनी प्रेरणा थी कि इससे पुलिस के सिपाही हाथ में बंदूक न होते हुए भी मुठभेड़ के दौरान मुंह से ठांय-ठांय कहते हुए अपराधियों को ठिकाने लगाते दिखाई देने लगे. यह बात अलग है कि मुंह से ठांय-ठांय करने वाले बहादुर पुलिस कर्मी मनोज कुमार हाल ही में संभल में हुई असली मुठभेड़ में घायल हो गए हैं.

बहरहाल, ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री के नारे से जो जोश पुलिस की मानसिकता में भर रहा था उससे ज्यादा अपराधियों में भरने लगा. जुलाई, 2018 में बागपत जेल के भीतर कुख्यात अपराधी मुन्ना बजरंगी को दूसरे अपराधियों ने बर्बरतापूर्वक ठोक दिया. फर्रुखाबाद और गोरखपुर जेलों में अपराधियों का तांडव हुआ. उधर, रायबरेली में शराब पीते, दावतें उड़ाते अपराधी वीडियो बना कर उसे वायरल करते और इसी ठोक दो के अंदाज में अपने आसामियों को जेल के अंदर से वीडियो के जरिये धमकी देते दिखाई दिए.

फिर 2018 के आखिर में खबर आई कि कुख्यात अपराधी अतीक अहमद ने देवरिया जेल के भीतर ही अपना ‘ठुकाई केंद्र’ खोल रखा है. बाहर से शरीफ गुर्गे अतीक के गुर्गों के जरिए देवरिया लाए जाते और फिर ‘मिलवाई’ के नाम पर जेल प्रशासन के सहयोग से उन्हें जेल के भीतर अतीक के हवाले कर दिया जाता. उनकी बुरी तरह पिटाई करके उनके मनचाहे दस्तावेजों में दस्तखत कराए जाते और आतंक के दम पर उन्हें चुप रहने पर मजबूर किया जाता. जेल के भीतर से ठुकाई का धंधा चला रहे अतीक की अति से परेशान होकर लखनऊ के मोहित जायसवाल नामक एक व्यवसायी ने पुलिस में इसकी शिकायत की. उन्होंने कहा कि अतीक ने अपने गुंडों के जरिए उनका अपहरण करके उन्हें देवरिया जेल में अतीक के सामने पहुंचाया. वहां अतीक ने उनकी बुरी तरह पिटाई की और जान की धमकी देकर उनकी संपत्ति के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवा लिए.

खबर ने तूल पकड़ा तो पुलिस सक्रिय हुई. अतीक के गुंडे गिरफ्तार हुए, अतीक के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ और उसको देवरिया से बरेली जेल में भेज दिया गया. मगर बरेली में भी उसकी गुंडागर्दी बदस्तूर जारी रही. उधर देवरिया मामले की पुलिस जांच से पता चला कि अतीक के ‘ठुकाई केंद्र’ में अकेले मोहित जायसवाल की ही धुनाई नहीं हुई थी बल्कि तीन अप्रैल 2017 से 31 दिसंबर 2018 के बीच अतीक ने अपनी बैरक में 20 से अधिक लोगों को अपनी यातना का शिकार बनाया था. पुलिस जांच में अब तक ऐसे आठ लोगों की पहचान भी हो गई है जिनका अपहरण करके उन्हें बैरक नंबर सात में ले जाया गया था. वहां अतीक ने उनकी निर्ममता से पिटाई की और हत्या की धमकी देकर उनसे वसूली की गई. उनसे दस्तावेजों पर जबरन दस्तखत भी करवाये गए.

अतीक की धुनाई का आतंक बरेली जेल में भी जारी है. उसकी गुंडागर्दी से आतंकित होकर बरेली जिला जेल प्रशासन ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं. परेशान होकर अब उसने मांग की है कि बरेली जेल से अतीक को कहीं और शिप्ट कर दिया जाए. फिलहाल प्रशासन ने बरेली जेल के अधीक्षक को सुरक्षा गार्ड मुहैया करवा दिए हैं और अतीक की गुंडई से कैसे निपटा जाय इस पर मंथन अभी भी जारी है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नारे में इतनी प्रेरणा है कि अपराधी तो अपराधी शिक्षा के ऋषि कहे जाने वाले विश्वविद्यालयों के कुलपति भी अब ‘ठोक दो’ का गुरुमंत्र बांटने लगे हैं. 1987 में स्थापित वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. राजाराम यादव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘ठोक दो’ से इतने प्रभावित हुए हैं कि उन्होंने अपने छात्रों को यही सीख दे डाली है कि ‘रोओ मत, ठोक दो.’

कुलपति डाॅ. राजाराम यादव ने गाजीपुर में छात्रों के एक कार्यक्रम में छात्रों से कहा, ‘अगर तुम्हारा किसी से झगड़ा हो जाए तो रोते हुए कभी मेरे पास मत आना. उसकी पिटाई करके आना और अगर तुम्हारा वश चले तो उसका मर्डर करके आना. इसके बाद हम देख लेंगे.’ कुलपति के इस गैर जिम्मेदाराना बयान के बाद इस पर विवाद शुरु हुआ. पूर्व केंद्रीय मंत्री चिन्मयानंद ने कहा, ‘इतने बड़े शिक्षण संस्थान का प्रमुख छात्रों को उकसाता है तो यह राष्ट्रद्रोह है. ऐसे व्यक्ति को कुलपति पद पर रहने का हक नही है.’ मछली शहर के सांसद रामचरित्र निषाद ने कहा, ‘कुलपति का जो वीडियो वारयल हुआ है उसे सुनकर ऐसा लगता है कि वह अपराधियों की भाषा बोल रहे हैं. उनकी बात बर्दाश्त से बाहर है.’

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा ने तो इस बयान के बाद सीधे-सीधे राजाराम यादव की बर्खास्तगी की मांग ही कर डाली. यह मांग जोर पकड़ने लगी तो राज्यपाल ने भी मामले की जांच शुरु कर दी है. मगर मुख्यमंत्री से प्रेरित राजाराम पाल अपने ‘ठोक दो’ के बयान पर शर्मिंदा होने तक को राजी नहीं हैं. वे कहते हैं, ‘मेरी बोलने की शैली ही ऐसी है. मेरी बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है. हम तो छात्रों को बहादुर बनाने की बात कर रहे थे.’

अब कुलपति के इस स्पष्टीकरण के बाद 900 से ज्यादा डिग्री और पीजी काॅलेजों तथा 100 से अधिक तकनीकी काॅलेजों वाले वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के हजारों छात्र असमंजस में हैं कि वे कुलपति की बात को किस रूप में व्यवहार में लाएं. उधर, कुलपति आश्वस्त हैं कि उन्होंने तो जो कहा है वह प्रदेश के मुख्यमंत्री की प्रेरणा से ही कहा है. ठीक उसी तरह जैसे अतीक अहमद आश्वस्त है और ठीक उसी तरह जैसे कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखने में नाकाम होती उत्तर प्रदेश की पुलिस आश्वस्त है.

योगी ने जून 2017 में ‘ठोक दो’ के बारे में अपराधियों को जो चेतावनी दी थी उसमें कहा गया था कि अगर अपराधियों ने अपना रास्ता नहीं बदला तो पुलिस ऐसे लोगों को मार गिराने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी. हाल ही में मुख्यमंत्री की प्रेरणा से गाजीपुर में जनता ने जिस तरह से अराजक गुंडागर्दी की थी और जिस तरह से एक पुलिसकर्मी को ठोक दिया था उस पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था, ‘ये घटना इसलिए घटी है क्योंकि सीएम सदन में हों या मंच पर उनकी एक ही भाषा है- ठोक दो. कभी पुलिस को समझ नहीं आता कि किसको ठोकना है तो कभी जनता को समझ में नहीं आता कि किसे ठोकना है.’

अखिलेश यादव ने ऐसी ही टिप्पणी अभी फिर की है. उनका कहना है, ‘मुख्यमंत्री हर जगह अपनी ‘ठोको’ यानी एनकाउंटर नीति की वकालत करते हैं. इसके चलते अब अफसरों में एक चलन चल पड़ा है. जब भी उन्हें अपने ट्रांसफर की आशंका होती है वे किसी न किसी को ठोक देते हैं यानी एक एनकाउंटर कर देते हैं. इससे तो कानून का राज कायम नहीं हो सकता.’

लेकिन फिलहाल तो कानून का राज खोज रहे उत्तर प्रदेश में ‘ठोक दो’ का ही बोलबाला दिखता है. राज्य के मुख्यमंत्री कानून व्यवस्था में अभूतपूर्व सुधार का दावा कर रहे हैं, राज्य की पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी सोशल मीडिया पर एक दूसरे की छीछालेदर करते हुए आपसी जंग लड़ रहे हैं और उत्तर प्रदेश की जनता कानून व्यवस्था में सुधार का चिरस्थाई दुस्वप्न देखने को मजबूर है.