केंद्रीय कैबिनेट ने सोमवार को दलित, आदिवासी और अत्यंत पिछड़े तबके के अलावा अन्य जातियों के आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. इस बारे में संविधान संशोधन विधेयक को मंगलवार को संसद में रखे जाने की बात कही गई है. माना जा रहा है कि कांग्रेस इस विधेयक का समर्थन कर सकती है. हालांकि, संसद से पारित होने के बाद भी इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है. शीर्ष अदालत ने सरकारी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण के लिए 50 फीसदी की सीमा तय की है. वहीं, भाजपा के पूर्व वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने इसे जुमला बताया है. उन्होंने कहा है कि संसद में इस संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार के पास वक्त नहीं है.

केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने फर्जी आंगनबाड़ी लाभार्थियों को देशद्रोही बताया

केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने फर्जी आंगनबाड़ी लाभार्थियों को देशद्रोही बताया है. हिंदुस्तान में छपी खबर के मुताबिक उन्होंने यह टिप्पणी फर्जी आंगनबाड़ी लाभार्थियों का पता लगने के बाद की है. उन्होंने कहा, ‘जो बच्चों के भोजन की चोरी में शामिल हैं, जो आंगनबाड़ी इस तरह के कामों में शामिल हैं, यह देशद्रोह है. आपने न केवल एक बच्चे लाभ से वंचित किया बल्कि देश को नुकसान पहुंचाया.’ उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में बताया कि मंत्रालय को उत्तर प्रदेश में 15 लाख, असम में तीन लाख और झारखंड में एक लाख फर्जी लाभार्थी मिले हैं.

आईटी एक्ट की रद्द धारा-66 (ए) के तहत गिरफ्तारी पर केंद्र को फटकार

सूचना प्रौद्योगिकी कानून (आईटी एक्ट) की धारा-66 ए को खत्म किए जाने के बाद भी इसके तहत गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई है. अमर उजाला के पहले पन्ने पर प्रकाशित खबर के मुताबिक शीर्ष अदालत ने कहा गया है कि अगर इसे नहीं रोका गया तो ऐसा करने वाले अधिकारियों की गिरफ्तारी की जाएगी. न्यायाधीश आरएफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र समेत अन्य पक्षों को इस बारे में चार हफ्ते में जवाब देने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट में इस बारे में याचिका पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज ने दायर की थी. इससे पहले साल 2015 में शीर्ष अदालत ने धारा-66 (ए) को अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन बताते हुए रद्द कर दिया था.

चुनाव से पहले भाजपा को एक और झटका, नागरिकता संशोधन विधेयक के मुद्दे पर एजीपी ने साथ छोड़ा

इस साल अप्रैल-मई में होने वाले लोक सभा चुनाव से पहले भाजपा को एक और बड़ा झटका लगा है. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक नागरिकता संशोधन विधेयक के मुद्दे पर असम में पार्टी की सहयोगी असम गण परिषद (एजीपी) ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से अलग होने का एलान कर दिया है. एजीपी अध्यक्ष अतुल बोरा ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मिलने के बाद कहा कि केंद्र सरकार को इस बारे में मनाने की आखिरी कोशिश भी विफल रही है. उधर, इस विधेयक के नए मसौदे को केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है. इसके तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के गैर-मुसलमान शरणार्थियों को आसानी से नागरिकता देने का प्रावधान है. बताया जाता है कि यह विधेयक मंगलवार को संसद में पेश किया जा सकता है.