केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में केंद्रीय श्रमिक संघों ने आज और कल दो दिन के भारत बंद का ऐलान किया है. एक संयुक्त बयान जारी करते हुए उन्होंने बताया है कि भारत बंद में देशभर के करीब 20 करोड़ कर्मचारी शामिल हैं. पूरे देश में इस बंद का मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है. अधिकतर जगहों में परिवहन सेवाएं बंद हैं.

केंद्रीय श्रमिक संघों ने यह बंद केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में बुलाया है. उन्होंने इन नीतियों को श्रमिक विरोधी नीति करार दिया है. श्रमिक संघों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार श्रम सुधारों पर उनकी बात नहीं सुन रही. श्रमिक संघ ट्रेड यूनियन अधिनियम 1926 में प्रस्तावित संशोधनों के विरोध के साथ-साथ न्यूनतम वेतन में बढ़ोत्तरी और फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने समेत कई मांगों के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं.

श्रमिक संघों के अतिरिक्त आज और कल बैंककर्मियों की भी हड़ताल है. ऑल इंडिया बैंक इम्प्लाईज एसोसिएशन (एआईबीईए) और बैंक इम्प्लाईज फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीईएफआई) से जुड़े बैंककर्मी हड़ताल पर हैं. वे वेतन वृद्धि और बैंकों के विलय का विरोध कर रहे हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) ने भी इस बंद का समर्थन किया है.

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में आज सुबह विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया. हावड़ा में प्रदर्शनकारियों ने रेल ट्रक में खड़े होकर प्रदर्शन किया जिसके कारण रेल सेवा प्रभावित हुई. वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा था, ‘हमने किसी भी बंद को समर्थन नहीं देने का फैसला किया है. अब बहुत हो गया पिछले 34 वर्षों में वाम मोर्चे ने बंद का आह्वान कर पूरे राज्य को बर्बाद कर दिया. अब कोई बंद नहीं होगा.’

ओडिशा में भी बंद का व्यापक असर देखने को मिला. बंद समर्थकों ने सुबह-सुबह की सड़कों पर उतरकर सरकार के विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी और सड़कों पर चल रही निजि वाहनों को रोका और सड़क पर टायर जलाकर यातायात प्रभावित करने की कोशिश की. केरल और कर्नाटक में भी कई प्रदर्शनकारी सड़क पर उतरे और बंद का समर्थन किया.