अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पांच जजों की संविधान पीठ का गठन कर दिया है. एनडीटीवी के मुताबिक इस पीठ का नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई करेंगे. इसके साथ ही जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को भी इस पीठ में शामिल किया गया है. यह पीठ इसी महीने की दस तारीख को इस मामले में सुनवाई करेगी. साथ ही यही पीठ यह फैसला भी करेगी कि इस पर नियमित सुनवाई की जाएगी या नहीं.

इस मामले पर तीन जनवरी को रंजन गोगोई और जस्टिस एसके कौल की खंडपीठ ने सुनवाई की थी. तब उस खंडपीठ ने अयोध्या विवाद पर एक नई खंडपीठ के गठन की बात करते हुए दस जनवरी तक के लिए सुनवाई टाल दी थी. इससे पहले बीते साल अक्टूबर में इस मामले की जल्दी सुनवाई को लेकर लगाई याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था. त​ब शीर्ष अदालत ने कहा था कि उसकी अपनी ‘प्राथमिकताएं’ हैं. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को जनवरी 2019 के पहले हफ्ते में ‘उचित बेंच’ के समक्ष सूचीबद्ध करने की बात भी कही थी.

इस बीच कई हिंदू संगठनों और नेताओं ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर केंद्र सरकार से अध्यादेश लाने की भी मांग की. हालांकि बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट किया था कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद ही उनकी सरकार कोई अध्यादेश लाने पर विचार कर सकती है.

इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अयोध्या की विवादित जमीन को राम की जन्मभूमि स्वीकार किया था. साथ ही सितंबर 2010 में सुनाए फैसले में विवादित जमीन का दो तिहाई हिस्सा हिंदू संगठनों जबकि बाकी उत्तर प्रदेश के सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को देने का फैसला सुनाया था. हालांकि इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले पर सभी पक्षों ने असंतोष जताया था और इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. तब मई 2011 में इस मुद्दे पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले पर स्टे (रोक) लगा दिया था.