सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश यूयू ललित ने खुद को उस संविधान पीठ से अलग कर लिया है जिसे राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि के मालिकाना हक के मामले की सुनवाई के लिए गठित किया गया है. खबर के मुताबिक मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन द्वारा दी गई एक जानकारी के बाद न्यायाधीश ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया.

पीटीआई ने बताया कि आज मामले की सुनवाई शुरू होते ही राजीव धवन ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि जस्टिस ललित उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पैरवी करने के लिए 1994 में अदालत में पेश हुए थे. हालांकि धवन ने कहा कि वे जस्टिस ललित के मामले की सुनवाई से अलग होने की मांग नहीं कर रहे, लेकिन न्यायाधीश ने स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग करने का फैसला किया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक नई पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई के लिए 29 जनवरी की तारीख तय की है.