कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी रफाल लड़ाकू विमानों की ख़रीद के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमलावर रुख़ अपनाए हुए हैं. उन्होंने गुरुवार को ट्वीट किया. इसमें लिखा, ‘प्रधानमंत्री सीबीआई प्रमुख को हटाने की इतनी जल्दबाजी में क्यों हैं? उन्होंने सीबीआई प्रमुख को चयन समिति के सामने अपना पक्ष रखने की अनुमति क्यों नहीं दी?’ जवाब: रफाल.’

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा की नियुक्ति से जुड़ी ताज़ा परिस्थिति के मद्देनज़र प्रधानमंत्री ने चयन समिति की बैठक बुलाई है. इस बैठक में बुधवार को कोई फ़ैसला नहीं हो पाया. इसलिए गुरुवार को फिर बैठक बुलाई गई है. समिति काे तय करना है कि आलोक वर्मा सीबीआई निदेशक के पद पर रह सकते हैं या नहीं. इसी पर राहुल गांधी ने यह प्रतिक्रिया दी है. यहां ग़ौर करने की बात ये भी है कि वर्मा 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हो रहे हैं.

कानून के मुताबिक सीबीआई निदेशक का कार्यकाल दो साल नियत है. उससे पहले उन्हें सिर्फ़ उनका चयन करने वाली समिति ही हटा सकती है. इस समिति के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं. इसमें सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस या उनकी ओर से नामित जज और लोक सभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता सदस्य होते हैं. इस तरह अभी की बैठकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके सीकरी और लोक सभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे हिस्सा ले रहे हैं. गुरुवार को ये सभी फिर बैठने वाले हैं.

दरअसल यह स्थिति इसलिए बनी है क्योंकि केंद्र सरकार ने पिछले साल अक्टूबर में आलोक वर्मा को जबरन छुट्‌टी पर भेज दिया था. एजेंसी में उनके बाद दूसरे नंबर के अफसर राकेश अस्थाना के साथ विवाद और आरोप-प्रत्यारोप सतह पर आ जाने के बाद दाेनों पर यह कार्रवाई की गई थी. सरकार ने वर्मा की जगह एम नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम प्रमुख बना दिया. लेकिन वर्मा इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट चले गए. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अभी दो दिन पहले ही उन्हें उनके पद पर बहाल करने का फै़सला सुना दिया.