आर्थिक तौर पर कमजोर सवर्णों को शिक्षा व नौकरियों में दस फीसदी आरक्षण देने वाले प्रस्तावित कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. खबरों के मुताबिक इसके खिलाफ यूथ फॉर इक्वलिटी नाम की एक संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. इस याचिका में कहा गया है कि आर्थिक आधार पर आरक्षण की व्यवस्था को लागू नहीं किया जा सकता. इसमें सवर्णों के आरक्षण की व्यवस्था को संविधान की मूल भावना के खिलाफ भी बताया गया है.

याचिका में आगे गया है कि सामान्य वर्ग को आरक्षण का प्रस्ताव आरक्षण की निर्धारित 50 फीसदी सीमा का उल्लंघन है. इसके अलावा इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर संसद में केवल दो दिन बहस कराई गई, जिसके बाद इसे लोकसभा और राज्यसभा में पारित कर दिया गया. इसलिए प्रस्तावित कानून को निरस्त किया जाना चाहिए.

इससे पहले इसी मंगलवार को लोकसभा में सरकार ने ‘सवर्ण आरक्षण विधेयक’ पेश किया था. चुनिंदा पार्टियों को छोड़कर कांग्रेस सहित अन्य दलों ने इसका समर्थन किया था. तब लोकसभा में इसके पक्ष में 323 जबकि विरोध में तीन वोट पड़े थे. इसके बाद बुधवार को राज्यसभा में पेश संविधान के इस 124वें संशोधन विधेयक को सात के मुकाबले 156 वोटों से पारित कर दिया गया था.

संविधान के 124वें संशोधन विधेयक के दोनों सदनों में पारित होने को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सामाजिक न्याय की जीत बताया था. उन्होंने यह भी कहा था कि इससे देश में व्यापक बदलाव आएगा. फिलहाल इस विधेयक को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के समक्ष भेजा जाएगा. उनकी सहमति मिलने के बाद यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा.