सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने गुरुवार को कहा कि भारतीय सेना में समलैंगिक यौन संबंधों और व्यभिचार की अनुमति नहीं दी जाएगी. सेना प्रमुख का यह बयान उच्चतम न्यायालय द्वारा वयस्कों के बीच समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और ब्रिटिश कालीन व्यभिचार संबंधी एक कानूनी प्रावधान को निरस्त करने के कुछ महीने बाद आया है.

इन मामलों पर उच्चतम न्यायालय के दो ऐतिहासिक फैसलों से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए जनरल रावत ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘सेना में यह स्वीकार्य नहीं है. हम कानून से ऊपर नहीं है, लेकिन सेना में समलैंगिक यौन संबंध और व्यभिचार को अनुमति देना संभव नहीं होगा.’ उन्होंने कहा, ‘सेना रूढिवादी है. सेना एक परिवार है. हम इसे सेना में नहीं होने दे सकते.’

सेना में व्यभिचार के मामले बड़े पैमाने पर सामने आते रहे हैं और आरोपियों को अक्सर कोर्ट मार्शल का सामना करना पड़ता है. पिछले साल उच्चतम न्यायालय की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने एकमत से वयस्कों के बीच आपसी सहमति से अप्राकृतिक यौन संबंधों को अपराध घोषित करने वाली भादंसं की धारा 377 को निरस्त किया था. इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने व्यभिचार संबंधी ब्रिटिश कालीन कानूनी प्रावधान को निरस्त करते हुए कहा था कि यह असंवैधानिक है और महिलाओं को ‘पतियों की संपत्ति’ मानता है.