सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को पद पर बहाल किए जाने के दो दिन बाद ही प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने उन्हें पद से हटा दिया है. द इकॉनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सीबीआई प्रमुख को नियुक्त करने वाली चयन समिति ने आलोक वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाया है. इसी आधार पर उन्हें पद से हटाकर अब उनका तबादला फायर सेफ्टी विभाग के महानिदेशक (डीजी) के पद पर कर दिया गया है.

बीते मंगलवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा को सीबीआई के निदेशक पद पर बहाल किया था. वहीं बुधवार को 77 दिन बाद अपने पद पर लौटे वर्मा ने सीबीआई के कई अधिकारियों का ट्रांसफर रद्द कर उन्हें दिल्ली वापस बुला लिया था. अब तक सीबीआई निदेशक का कार्यभार संभाल रहे नागेश्वर राव ने इन अधिकारियों का ट्रांसफर किया था. इससे पहले बीते साल अक्टूबर में आलोक वर्मा और सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना द्वारा एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाने के बाद सरकार ने इन दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेज दिया था.

आलोक वर्मा ने सरकार के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. हालांकि उन्हें पद पर बहाल करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा था कि वे एजेंसी के प्रमुख के तौर पर अपने दफ़्तर जा सकते हैं. सामान्य कामकाज भी कर सकते हैं. लेकिन कोई बड़े नीतिगत फ़ैसले नहीं ले सकते. इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि आलोक वर्मा के बारे में अब कोई भी फैसला सीबीआई निदेशक को नियुक्त करने वाली चयन समिति ही करेगी. सीबीआई निदेशक का चयन करने वाली समिति में प्रधानमंत्री, लोक सभा में विपक्ष के नेता (या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता अगर प्रतिपक्ष के नेता न हों तो), सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा नामित एक अन्य जज होते हैं.