अखिलेश यादव पिछले शुक्रवार को अचानक दिल्ली के कनॉट प्लेस में पहुंच गये थे. अपनी एक अति महत्वपूर्ण मुलाकात से पहले वे यहां सीताफल आईसक्रीम ढूंढ रहे थे. उनके खास लोग नैचुरल्स की सीताफल आइसक्रीम का पूरा डब्बा पैक कराकर वहां से बाहर निकले और फिर वे गुरुद्वारा रकाबगंज रोड की तरफ चले गये. अगले तीन घंटों में लोकसभा चुनाव के लिए सबसे निर्णायक गठबंधन तैयार हो गया. इसके बाद अखिलेश यादव ने आइसक्रीम भेंटकर मायावती का शुक्रिया कहा.

अखिलेश यादव और मायावती के बीच हुई इस मुलाकात पर राहुल गांधी की भी नजर थी. इसके अगले दिन इन दोनों नेताओं ने घोषणा कर दी कि सपा और बसपा 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी और दो सीटें अन्य के लिए छोड़ी जा रही हैं. इसके बाद बची दो सीटें - अमेठी और रायबरेली - पर दोनों ने अपने उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है.

कांग्रेस के कुछ बड़े नेता चाहते थे कि गठबंधन को लेकर राहुल गांधी खुद मायावती से बात करें. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और अब इसकी कोई उम्मीद भी नहीं है. राहुल गांधी की टीम में काम करने वाले एक अहम सूत्र बताते हैं कि इस बार कांग्रेस अकेले दम पर उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ेगी. प्रियंका गांधी की निगरानी में काम करने वाली टीम ने उत्तर प्रदेश में हर सीट के हिसाब से अलग-अलग रणनीति बनाने का काम शुरू कर दिया है.

इस टीम के एक सूत्र ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कुछ समय पहले भारतीय जनता पार्टी का भी वही हाल था जो इस वक्त कांग्रेस का है. अगर 2014 में भाजपा यहां पर दोबारा ज़िंदा हो सकती है तो 2019 में कांग्रेस की भी वापसी की जा सकती है. इसी पटकथा पर राहुल और प्रियंका गांधी काम कर रहे हैं. कांग्रेस की रिसर्च एंड एनेलिसिस टीम ने पिछले कुछ दिनों में उस मॉडल का अध्ययन किया है जिसके जरिए भाजपा 2014 में 80 में से 71 सीटें जीत जीती थी.

सुनी-सुनाई है कि राहुल गांधी चाहते हैं कि कांग्रेस इस बार सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़े और चालीस सीट जीतने की कोशिश करे. कांग्रेस को अपने विश्लेषण में पता चला है कि भाजपा के सिटिंग सांसदों के खिलाफ जबरदस्त एंटी इंकंबेंसी है और भाजपा चाहकर भी सभी सांसदों का टिकट नहीं काट सकती. दूसरी वजह, जब सपा और बसपा आधी-आधी सीटों पर लड़ेंगी तो इन दोनों ही पार्टियों के कई ऐसे बड़े दिग्गज नेता होंगे जिन्हें टिकट नहीं मिलेगा. राहुल-प्रियंका की टीम ऐसे कई नेताओं के साथ बात कर रही है.

उत्तर प्रदेश में चुनाव जीतने के लिए पहला आइडिया है कि जो भी दबंग, दिग्गज और प्रभावशाली नेता हो उसे टिकट दो, फिर चाहे उसकी छवि कैसी भी हो. दूसरा, राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में सीधा इस मुद्दे पर चुनाव लड़ेंगे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अगर रोकना है तो असली चैलेंजर अखिलेश यादव या मायावती नहीं हैं, वे हैं. तीसरा कांग्रेस की नजर ब्राह्मण वोटरों पर है इसलिए कांग्रेस उत्तर प्रदेश के कई प्रभावशाली ब्राहमण नेताओं को भी टिकट देने के मूड में है.

कांग्रेस की रिसर्च टीम ने यूपी जीतने के लिए एक बी-एम फॉर्मूला इजाद किया है - बी मतलब ब्राह्मण और एम मतलब मुसलमान. उत्तर प्रदेश में करीब 16 से 18 फीसदी ब्राह्मण वोटर हैं जो देश में किसी भी राज्य से सबसे ज्यादा हैं. मुसलमान मतदाता भी करीब 14 फीसदा है. 2009 में इसी वोट बैंक ने कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में आधा ज़िंदा कर दिया था. दस साल पहले कांग्रेस उत्तर प्रदेश में 21 सीटें जीती थी और भाजपा सिर्फ 10 सीटों पर ठहर गई थी. उस वक्त सपा को 23 और बसपा को 20 सीटें मिली थी. सालों बाद यह पहला मौका था जब कांग्रेस 20 सीटों के पार पहुंची थी. राहुल की टीम इसी फॉर्मूले को और मजबूती से जमीन पर उतारना चाहती है.

राहुल गांधी हर उस राज्य में नरेंद्र मोदी से आमने-सामने की लड़ाई लड़ना चाहते हैं जहां कांग्रेस का भाजपा से सीधा मुकाबला है. इसीलिए उन्होंने गल्फ न्यूज़ के इंटरव्यू में कहा कि उत्तर प्रदेश के नतीजे इस बार सबको चौका देंगे क्योंकि वे इस बार धाकड़ आइडिया लेकर आने वाले हैं. उन्हें यह भी लगता है कि अगर वे सपा-बसपा के साथ गठबंधन करेंगे तो तथाकथित ऊंची जातियां कांग्रेस का साथ छोड़कर एक बार फिर से भाजपा के पाले में जा सकती हैं.

सूत्रों से पता चला है कि तीन महीने पहले तक कांग्रेस के दो बड़े नेता अखिलेश यादव और मायावती से बात कर रहे थे. मायावती के साथ समझौते को लेकर बात आगे बढ़ी भी थी, लेकिन अखिलेश यादव इस बार राहुल गांधी के साथ हाथ मिलाने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे. कांग्रेस के एक नेता ने बताया कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के नतीजे आने से पहले मायावती और अखिलेश के करीबी नेता कांग्रेस को सिर्फ पांच सीटें ऑफर कर रहे थे. जब तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार बन गई तब इसे बढ़ाकर कर दिया गया. लेकिन कांग्रेस 30-30-20 का फॉर्मूला चाहती थी. यानी सपा-बसपा तीस-तीस सीटों पर चुनाव लड़ें और कांग्रेस को 20 सीटें दी जाए.

उत्तर प्रदेश की रणनीति बनाने में जुटे कांग्रेसी बताते हैं कि अगर कांग्रेस दस से कम सीटों पर चुनाव लड़ेगी तो पूरे चुनाव में नरेंद्र मोदी और अमित शाह यही कहेंगे कि कांग्रेस को वोट मत दो क्योंकि ये तो सिंगल डिजट पार्टी है. इतना तो पूरे देश का वोटर जानता है कि जो उत्तर प्रदेश में चुनाव जीतेगा वही देश का प्रधानमंत्री बनेगा. अगर कांग्रेस चुनाव न भी जीते लेकिन माहौल बनाने के लिए उत्तर प्रदेश की सभी अस्सी सीटों पर चुनाव लड़ना जरूरी है.

राहुल गांधी ने माहौल बनाना शुरू कर दिया है. उत्तर प्रदेश हो या पूरा देश, वही इकलौते नेता हैं जो मोदी को हरा सकते हैं, इस आइडिया में उन्हें अपनी जीत दिखाई देती है.