प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली चयन समिति द्वारा सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा को पद से हटाए जाने की खबर आज सोशल मीडिया पर चल रही बहस के केंद्र में है. यहां विरोधियों और अन्य लोगों ने इस फैसले के चलते मोदी सरकार को जमकर घेरा है. वरिष्ठ पत्रकार संकर्षण ठाकुर ने ट्वीट करके सवाल उठाया है, ‘क्या सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा को पद से हटाने से पहले अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया जाना चाहिए था? मोदी सरकार की इस फैसले को लेकर बेचैनी भरी जल्दबाजी एक बार फिर साफ-साफ जाहिर हुई है.’

कांग्रेस आरोप लगाती रही है कि सरकार ने बीते साल आलोक वर्मा को इसीलिए जबर्दस्ती छुट्टी पर भेज दिया था क्योंकि वे रफाल सौदे की जांच करना चाहते थे. सोशल मीडिया पर आज कांग्रेस समर्थकों के साथ-साथ दूसरे लोगों ने भी इस बात का जिक्र करते हुए मोदी सरकार के ताजा फैसले पर टिप्पणियां की हैं. फेसबुक पर एक यूजर ने चुटकी ली है, ‘तुम जो सीबीआई हेड को बार-बार हटा रहे हो, क्या घोटाला है
जिसे छिपा रहे हो?’ इसके साथ ही सोशल मीडिया में इस खबर को लेकर और भी दिलचस्प प्रतिक्रियाएं भी आई हैं. मसलन ट्विटर हैंडल @OneTipOneHand_ पर तंजभरी प्रतिक्रिया है, ‘आग से नाता, मोदी से रिश्ता काहे मन समझ ना पाया - आलोक वर्मा.’

आलोक वर्मा को सीबीआई प्रमुख के पद से हटाए जाने की खबर पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :

विनोद कापड़ी | @vinodkapri

चयन समिति ने आलोक वर्मा के खिलाफ जिन आरोपों (भ्रष्टाचार के) को प्रथम दृष्टया सही माना है, उस आधार पर तो उन्हें फायर सर्विस का डीजी बनाए जाने के बदले तिहाड़ जेल में होना चाहिए. क्या सरकार जवाब देगी कि जब एक ‘भ्रष्टाचारी’ सीबीआई निदेशक नहीं हो सकता तो वो डीजी फायर सर्विस कैसे हो सकता है.

गब्बर | @GabbbarSingh

अस्थाना-वर्मा सीरीज में 2-1 से जीतने के बाद नरेंद्र मोदी ट्रॉफी चूमते हुए :

जेट ली (वसूली भाई) |‏ @Vishj05

विपक्ष – सुप्रीम कोर्ट द्वारा पद पर बहाल किए गए सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को हटाया जाना असंवैधानिक है.
मोदी – तो क्या... हम संविधान बदल देंगे.

आदित्य मगल | @jhunjhunwala

उदय चोपड़ा वापसी के बाद बॉलीवुड में जितने समय टिक पाए थे, आलोक वर्मा उससे भी कम समय तक सीबीआई में वापसी के बाद रह पाए.

केतन | facebook

99 पर सांप काटना क्या होता है, ये आप आलोक वर्मा से पूछिये.