सुप्रीम कोर्ट द्वारा आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद पर बहाल किए जाने के तीसरे दिन ही केंद्र सरकार ने उनका दूसरे विभाग में तबादला कर दिया है. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. मंगलवार को शीर्ष अदालत ने आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक रहते हुए छुट्टी पर भेजे जाने के केंद्र के फैसले को रद्द कर दिया था. इसके बाद गुरुवार को उनके भविष्य पर फैसला करने वाली समिति ने 2-1 के बहुमत से उनके तबादले का फैसला लिया. समिति की बैठक में सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इससे अपनी असहमति जताई थी. वहीं, समिति के अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एक अन्य सदस्य सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एके सीकरी थे.

नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर साहित्यकार, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता पर राजद्रोह का मामला

नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध करने पर साहित्यकार हीरेन गोहेन, सामाजिक कार्यकर्ता अखिल गोगोई और पत्रकार मंजीत महंत के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है. अमर उजाला में छपी खबर के मुताबिक तीनों आरोपित एनजीओ ‘नागरिक समाज’ के तहत इस विधेयक के खिलाफ अभियान चला रहे थे. इस बारे में गुवाहाटी के पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए राजद्रोह के साथ आपराधिक साजिश (धारा-120बी) और सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने या फिर भड़काने से संबंधित धारा-121 व 123 के तहत मामला दर्ज किया गया है. उधर, इस विवादित विधेयक को लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों में विरोध प्रदर्शन जारी है. शुक्रवार को असम बंद भी बुलाया गया है. वहीं, असम आंदोलन के शहीदों के परिजनों के प्रतिनिधि संगठन ने नागरिकता कानून में संशोधन के खिलाफ सम्मान लौटाने का फैसला किया है.

एक साथ तीन तलाक पर फिर से अध्यादेश को मंजूरी

केंद्र सरकार ने एक साथ तीन तलाक को लेकर प्रस्तावित कानून के संसद से पारित न होने के बाद इसे अध्यादेश के रूप में लागू करने का फैसला किया है. इससे पहले जारी अध्यादेश की समय-सीमा 22 जनवरी को खत्म हो रही है. नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र अब बजट सत्र में फिर से इससे जुड़े विधेयक को संसद में रखने की तैयारी में है. इससे पहले वरीयता सूची में रहने के बाद भी इस विधेयक को राज्य सभा से पारित कराने में सरकार को कामयाबी हासिल नहीं हो पाई थी. इस पर विपक्ष का कहना है कि सरकार इस विधेयक को बिना सबकी सहमति हासिल किए हड़बड़ी में लाई है. संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक अध्यादेश की अवधि छह महीने या फिर संसद सत्र के शुरू होने के छह हफ्ते तक रहती है.

पूरे देश में 92,000 स्कूल एक शिक्षक के भरोसे

शिक्षा के अधिकार (आरटीई) कानून लागू होने के करीब नौ साल बाद भी देश में 92,000 स्कूल एक-एक शिक्षक के कंधों पर हैं. हिन्दुस्तान में प्रकाशित खबर के मुताबिक बीते चार वर्षों में सभी राज्य सरकारों ने कुल मिलाकर केवल 15,000 एकल शिक्षक स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षक बहाल करने में कामयाबी हासिल की है. इनमें अकेले उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 8,773 है. दूसरी ओर, एकल शिक्षक स्कूल के मामले में मध्य प्रदेश और राजस्थान सभी राज्यों में अव्वल हैं. वहीं, झारखंड में इस तरह के स्कूलों की संख्या घटने की जगह बढ़ रही है. साल 2013 से 2017 के बीच इस राज्य में 973 स्कूलों का इजाफा हुआ है. इसके साथ ही, दिल्ली और उत्तराखंड में भी एकल स्कूल शिक्षकों की संख्या में मामूली बढ़ोतरी हुई है.