केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा ने कहा है कि इस पद पर रहते हुए उन्होंने संस्थान की साख को बचाने की कोशिश की, जबकि उसे नुकसान पहुंचाए जाने के प्रयास किए गए. आलोक वर्मा ने सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना का नाम लिए बिना कहा कि यह ‘दुख की बात’ है कि केवल एक व्यक्ति द्वारा लगाए गए ‘झूठे, अप्रमाणित और हल्के’ आरोपों के आधार पर उनका ट्रांसफर कर दिया गया.

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में आलोक वर्मा ने कहा, ‘सीबीआई ऊंचे पदों पर होने वाले भ्रष्टाचार की जांच करने वाली संस्था है, जिसकी स्वतंत्रता को संरक्षित व सुरक्षित किया जाना चाहिए. इसे बाहरी दखल के बिना काम करना चाहिए. मैंने संस्थान की साख को बचाने की कोशिश की, जबकि इसे बर्बाद करने के प्रयास किए गए. इस बात को केंद्र सरकार और सीवीसी के 23 अक्टूबर, 2018 के आदेशों से समझा जा सकता है जिन्हें अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर जारी किया गया और जिन्हें बाद में (अदालत द्वारा) खारिज कर दिया गया.’

पूर्व सीबीआई निदेशक ने आगे कहा, ‘केवल एक ऐसे व्यक्ति के झूठे, अप्रमाणित और हल्के आरोपों के आधार पर मेरा ट्रांसफर कर दिया गया जो मेरे खिलाफ था. मेरा भविष्य तय करने के लिए बनाई गई समिति के आदेश के मुताबिक मेरा ट्रांसफर कर दिया गया है. मैं संस्थान की अखंडता के लिए खड़ा हुआ, और कहा जाए, तो मैं कानून को बचाने के लिए फिर ऐसा करूंगा.’