भारतीय रेलवे ने अपनी कुछ नौकरियों में महिलाओं की भर्ती न किए जाने का अनुरोध किया है. रेलवे ने इन नौकरियों से जुड़े कामों को ‘मुश्किल’ बताते हुए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को लिखा है कि आगे से इन कामों के लिए केवल पुरुषों को नौकरी दी जाए. हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक रेलवे ने रेल चालकों, कुली, सुरक्षाकर्मी और रेलवे ट्रैक की जांच करने वाले गैंगमैन के काम से जुड़ी परिस्थितियों को ‘कठिन’ बताते हुए यह कदम उठाया है.

विभाग को लिखे पत्र में रेलवे ने यह भी कहा कि कई महिलाकर्मियों ने इन कामों से जुड़े हालात को असुरक्षित और कठिन बताया है. खबर के मुताबिक रेलवे के स्टाफ सदस्य एसएन अग्रवाल ने कहा, ‘महिला कर्मचारियों का एक दल रेलवे बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष से मिला था, जिसके मद्देनजर एक पत्र डीओपीटी को लिखा गया. इसमें सुझाव दिया गया कि महिलाओं को (कठिन काम वाली) नौकरियों से निकाल देना चाहिए. महिलाओं की सुरक्षा और काम के हालात चिंता का विषय हैं. फिलहाल ये काम लैंगिक रूप से विचार किए बिना दिए जाते हैं.’

रेलवे में कुल 13 लाख लोग काम करते हैं. इनमें महिलाओं की भागीदारी केवल दो से तीन प्रतिशत है. उसमें भी ज्यादातर नौकरियां डेस्क पर बैठने वाली हैं, जबकि चालक, सुरक्षाकर्मी और ट्रैकमैन का काम लगातार चलता है और उनकी कभी भी जरूरत पड़ सकती है. इस पर भारतीय रेलवे के स्टाफ सदस्य रहे श्री प्रकाश (रिटायर्ड) कहते हैं, ‘रेलवे लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता. लेकिन सच यही है कि ये काम मुश्किल हैं. रनिंग स्टाफ को इसीलिए ज्यादा सुविधाएं मिलती हैं क्योंकि उनका काम व्यावहारिक रूप से ज्यादा मुश्किल है.’ हालांकि श्री प्रकाश ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि डीओपीटी रेलवे की बात से सहमत होगा.

वहीं, रेलवे यूनियन के एक सदस्य संजय पंढी ने अखबार से कहा कि विभाग को हर किसी को बेहतर सुविधाएं देने पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘रेलवे में महिलाओं की जरूरत के हिसाब से बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, इसलिए वे चाहते हैं कि महिलाएं इन कामों के लिए आगे न आएं. (लेकिन) ऐसा करने के बजाय रेलवे को अपनी सुविधा में सुधार करना चाहिए.’