सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में भारत को तालिबान के साथ शांति वार्ता में हिस्सा लेना चाहिए. यह वहां भारत के हितों को बढ़ावा देने के लिए ज़रूरी है.

समाचार एजेंसी भाषा के अनुसार मीडिया से बातचीत में जनरल बिपिन रावत ने कहा, ‘तालिबान के साथ कई देश बातचीत कर रहे हैं. इस मुद्दे का निर्णय हमें करना है कि क्या अफ़ग़ानिस्तान में हमारे हित हैं? हमारी सोच ये है कि ‘हां’ अफ़ग़ानिस्तान में हमारे हित हैं. और यदि हमारे हित हैं तो, और यदि अन्य लोग कह रहे हैं कि वार्ता होनी चाहिए तो, हमें उसका हिस्सा बनना चाहिए. यह प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर हो सकता है. आप इस बातचीत से अलग नहीं रह सकते.’ उन्होंने बुधवार को भी यही कहा था.

अफ़ग़ानिस्तान के संदर्भ में जनरल बिपिन रावत ने कहा, ‘वहां कुछ क्षेत्रों में प्रगति हुई है. जनता के बीच से यह आवाज उठ रही है कि वह शांति चाहती है. इसीलिए कुछ देशों ने तालिबान के साथ वार्ता शुरू करने का निर्णय किया है. ऐसे में जब तक आप इस अहम बातचीत में नहीं बैठेंगे आपको पता नहीं चलेगा कि क्या हो रहा है.’ ग़ौर करें कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के साथ बातचीत में शामिल होने के बारे में सरकार के किसी वरिष्ठ अफ़सर की ओर से आई यह पहली सार्वजनिक राय है.

ग़ौरतलब यह भी है कि अमेरिका और रूस जैसी प्रमुख वैश्विक शक्तियां अफ़ग़ानिस्तान में शांति प्रक्रिया आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं. इसके लिए वे तालिबान तक पहुंच बना रही हैं. इन्हीं कोशिशों के तहत पिछले साल नवंबर में रूस की राजधानी मॉस्को में अफ़ग़ानिस्तान शांति प्रक्रिया सम्मेलन हुआ था. इसमें अमेरिका, पाकिस्तान और चीन सहित कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे. वहां तालिबान का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी था. तब भारत ने भी अपने दो पूर्व राजनयिकों को इसमें ‘गैर सरकारी’ हैसियत से भेजा था.